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Thursday, July 18, 2019

Disadvantage of Computer ( कंप्यूटर की कमियां ) Technology hindi solution

July 18, 2019 0

Disadvantage of Computer ( कंप्यूटर की कमियां )  

Limitations of Computer (कंप्यूटर की सीमाये या कमियां)

कंप्यूटर क्या हैं ? (What is Computer)

Computer एक ऐसा Electronic Device है जो User द्वारा Input किये गए Data में प्रक्रिया करके सूचनाओ को Result के रूप में प्रदान करता हैं, अर्थात् Computer एक Electronic Machine है जो User द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करती हैं| इसमें डेटा को स्टोर, पुनर्प्राप्त और प्रोसेस करने की क्षमता होती है। आप दस्तावेजों को टाइप करने, ईमेल भेजने, गेम खेलने और वेब ब्राउज़ करने के लिए कंप्यूटर का उपयोग कर सकते हैं। आप स्प्रैडशीट्स, प्रस्तुतियों और यहां तक ​​कि वीडियो बनाने के लिए इसका उपयोग भी कर सकते हैं।
Disadvantage of Computer ( कंप्यूटर की कमियां )
“कंप्यूटर User द्वारा Input किये गए डाटा को Process करके परिणाम को Output के रूप में प्रदान करता हैं ”
“The Data Input Process by Computer User by Output results are provided as “

Computer शब्द की उत्पत्ति अंग्रेजी के “COMPUTE” शब्द से हुई है जिसका अर्थ होता है “गणना करना” | अत: यह स्पष्ट होता है की Computer का सीधा संबंध गणना करने वाले यंत्र से है वर्तमान में इसका क्षेत्र केवल गणना करने तक सीमित न रहकर अत्यंत व्यापक हो चुका हैं| कम्प्यूटर अपनी उच्च संग्रह क्षमता (High Storage Capacity), गति (Speed), स्वचालन (Automation), क्षमता (Capacity), शुद्धता (Accuracy), सार्वभोमिकता (Versatility), विश्वसनीयता (Reliability), याद रखने की शक्ति के कारण हमारे जीवन के हर क्षेत्र में महत्वपूर्ण होता जा रहा है| Computer द्वारा अधिक सूक्ष्म समय में अधिक तीव्र गति से गणनाएं की जा सकती है कम्प्यूटर द्वारा दिये गये परिणाम अधिक शुद्ध होते है|
आजकल विश्व के हर क्षेत्र में Computer का प्रयोग हो रहा हैं जैसे – अंतरिक्ष, फिल्म निर्माण, यातायात, उद्योग व्यापर, रेलवे स्टेशन, स्कूल, कॉलेज, एरपोर्ट, आदि| Computer द्वारा जहाँ एक तरफ वायुयान, रेल्वे तथा होटलों में सीटों का आरक्षण होता है वही दूसरी तरफ बैंको में Computer की वजह से कामकाज सटीकता तथा तेजी से हो रहा हैं|

Limitations of Computer (कंप्यूटर की सीमाये)

Lack of Intelligence (बुद्धिमत्ता की कमी)

Computer एक Machine है| इसका कार्य User द्वारा दिये गए निर्देशों का पालन करना है Computer किसी भी स्थिति में न तो निर्देशों से अधिक और न ही इससे कम कार्य करता है Computer एक बिलकुल मुर्ख नौकर की तरह कार्य करता है इसे यदि आप कहे की जाओ और बाजार से सब्जी खरीद लो ऐसा निर्देश देने पर वह बाजार जायेगा और सब्जी भी ख़रीदेगा परन्तु सब्जी लेकर घर तक कभी नहीं लौटेगा | यहाँ प्रश्न उठता है- क्यों? इसका सीधा उत्तर है कि उससे आपने सब्जी खरीदने को अवश्य कहा पर उसे घर लाने को नहीं कहा | इसका अर्थ यह है कि Computer के अंदर सामान्य बोध नहीं होता हैं|

Unable in Self Protection (स्वयं की रक्षा करने में अक्षम)

Computer चाहे कितना शक्तिशाली क्यों न हो परन्तु उसका नियंत्रण मानव के पास ही होता है Computer किसी भी प्रकार से आत्मरक्षा नहीं कर सकता है उदाहरण के लिए श्याम नामक किसी व्यक्ति ने एक ई-मेल अकाउंट बनाया तथा एक विशेष पासवर्ड उसने Account खोलने के लिए चुना | Computer यह नहीं देखता कि उस Account को खोलने वाला श्याम ही है या नहीं बल्कि वह देखता है कि Password क्या हैं|

Lack of Decision Making (निर्णय लेने की कमी)

Computer में निर्णय लेने की क्षमता नहीं होती है क्योकि Computer एक बुद्धिमान मशीन नहीं है यह सही या गलत कि पहचान नहीं कर पाती है|
सरल शब्दों में सारांश (Summary Words)
  1. कम्‍प्‍यूटर एक मशीन हैं जिसका मुख्‍य कार्य यूजर द्वारा दिये गये निर्देशों का पालन करना होता हैं।
  2. कम्‍प्‍यूटर में निर्णय लेने की क्षमता नहीं होती हैं क्‍योकि कम्‍प्‍यूटर एक बुद्धिमान मशीन नहीं हैं।
  3. कम्‍प्‍यूटर चाहे कितना भी शाक्तिशाली क्‍यों न हो परन्‍तु उसका नियंत्रण मानव के पास ही होता हैं।
  4. कम्‍प्‍यूटर यूजर के निर्देशों का पालन करता हैं यूजर इसे जितना भी निर्देश देगें बस यह उतना ही कार्य करता हैं।
  5. कम्‍प्‍यूटर यूजर द्वारा दिए गए निर्देशों पर कार्य करता हैं चाहें वह निर्देश नैतिक हो या अनैतिक हो।
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Sunday, July 14, 2019

Types of System सिस्टम के कितने प्रकार होते है | - Technology hindi Solution

July 14, 2019 0
 Types of System सिस्टम के कितने प्रकार होते है  |
Types of System सिस्टम के कितने प्रकार होते है |

सिस्टम के निम्नलिखित प्रकार होते है |

Physical System

Abstract System

Open System

Closed System

Man-made Information System

1. Physical System: – एक सिस्टम में विभिन्न घटकों का समावेश होता है | फिजिकल सिस्टम ऐसी वस्तुओ का समूह होता है,जो वास्तव में उपस्थित हो ,उनका भोतिक रूप होता है ये Tangible or visible होते है अर्थात tangible को देख सकते है,छू सकते है और काउंट कर सकते है | फिजिकल सिस्टम को Statically या Dynamic रूप में ऑपरेट कर सकते है|

Example:- Static system: हम बैंक का उदाहरण लेते है जिसमे बहुत सी वस्तुए फिजिकल होती है,जैसे टेबल,कुर्सी,कंप्यूटर आदि यह सभी वस्तुए बैंक के कामकाज में उपयोगी होती है साथ ही इन भोतिक वस्तुओ का उपयोग कर अन्य कंपोनेट प्राप्त किये जा सकते है |

Dynamic system: कंप्यूटर का प्रयोग कर विभिन्न रिपोर्ट, कस्टमर का डाटा आदि बनाया जाता है | इस प्रकार के डाटा, रिपोर्ट, प्रोग्राम आदि सभी प्रयोगकर्ता के अनुसार बदलती रहती है अर्थात यह डायनामिक होती है |

2. Abstract System:-इस प्रकार के सिस्टम का फिजिकल अस्तित्व नहीं होता है | किसी सिस्टम में दो या अधिक कंपोनेट के बीच का फार्मूला आदि इस केटेगरी में आते है |

Example: बैंक सिस्टम में किसी कस्टमर के क़र्ज़ के ब्याज की गणना आदि | इस प्रकार के फार्मूला, अल्गोरिथम, या मॉडल फिजिकल सिस्टम के वास्तविक रूप का प्रतिनिधित्व करते है | किसी कार्य को एक मॉडल के रूप में बनाने से सिस्टम के विभिन्न कोम्पोनेट्स के बीच के सम्बन्ध आदि को समझना आसान हो जाता है |

3. Open System: – ओपन सिस्टम ऐसा सिस्टम है,जो बाहर के environment में स्वतंत्रतापूर्वक इंटरैक्ट करता है,यह सिस्टम environment से इनपुट लेता है ,और इसे ही आउटपुट लौटा देता है| इस सिस्टम का रिलेशन एनवायरमेंट से होता है |इसलिए जब एनवायरमेंट बदलता है ,तब सिस्टम outdated labeled हो जाएगा |

4. Close System: – क्लोज्ड सिस्टम एक ऐसा सिस्टम है,जो बाहर के environment से कोई रिलेशन नहीं रखता है | वातावरण में होने बाले कोई भी परिवर्तन इसको प्रभावित नहीं करते है क्लोज्ड सिस्टम बहुत कम होते है |

5. Man-made Information System:-इनफार्मेशन सिस्टम का प्रयोग जानकारी को रिसीव करने, स्टोर करने और सेंड करने के लिए किया जाता है 

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Friday, July 5, 2019

What is Computer Hardware हार्डवेयर क्‍या होता है

July 05, 2019 0

             Kya hota hai Hardwere हार्डवेयर क्‍या होता है 

हार्डवेयर Computer का Machinery भाग होता है जैसे LCD, की-बोर्ड, माउस, सी0पी0यू0, यू0पी0एस0 आदि जिनको छूकर देखा जा सकता है। इन Machinery Part के मिलकर computer का बाहरी भाग तैयार होता है तथा Computer इन्‍ही हार्डवेयर भागों से Computer की क्षमता का निर्धारण किया जाता है आजकल कुछ Software को Computer में चलाने के लिये निर्धारित Hardware की आवश्‍यकता होती है। यदि Software के अनुसार Computer में हार्डवेयर नहीं है तो Software को Computer में चलाया नहीं जा सकता है -

कंप्‍यूटर हार्डवेयर क्‍या होता है - What is Computer Hardware

जैसा कि आप जानते हैं कंप्यूटर एक मशीन है और कंप्यूटर के यही मशीनरी पार्ट्स कंप्यूटर का हार्डवेयर कहलाते हैं लेकिन ऐसा नहीं है कि अकेला हार्डवेयर की सभी काम कर सकता है कंप्यूटर का दूसरा हिस्सा सॉफ्टवेयर भी है सॉफ्टवेयर की सहायता से ही कंप्यूटर के हार्डवेयर को निर्देश दिए जाते हैं और निर्देशों को फॉलो करते हुए हार्डवेयर सभी काम करता है
मान लीजिए आपको कोई गाना सुनना है तो आप कंप्यूटर के किसी मल्टीमीडिया सॉफ्टवेयर से कोई गाना प्ले करेंगे लेकिन सुनने आपको स्पीकर की आवश्यकता होगी बिना स्पीकर की बिना स्पीकर के आप गाना नहीं सुन सकते हैं इसी प्रकार केवल स्पीकर के होने से ही आप गाना नहीं सुन सकते हैं आपके कंप्यूटर में मल्टीमीडिया एप्लीकेशन होना आवश्यक है किसी गाने को सुनने के लिए अगर आपके कंप्यूटर मल्टीमीडिया एप्लीकेशन नहीं है तो आप कंप्यूटर से कोई गाना प्ले भी नहीं कर सकते हैं अगर देखा जाए तो सॉफ्टवेयर कंप्यूटर की आत्मा है और हार्डवेयर उसका शरीर है दोनों का होना परम आवश्यक है किसी भी काम को करने के लिए

कंप्यूटर के साथ हार्डवेयर के रूप में जुड़े हुए सभी से महत्वपूर्ण होते हैं और अपना अलग-अलग काम करते हैं जैसे कीबोर्ड इनपुट लेता है और प्रिंटर आपको आउटपुट देता है

कम्प्यूटर के निम्‍न महत्वपूर्ण भाग होते है:-

•    मोनीटर या एल.सी.डी.
•    की-बोर्ड
•    माऊस
•    सी.पी.यू.
•    यू.पी.एस
  1. मोनीटर या एल सी डी:- इसका प्रोयोग कम्प्यूटर के सभी प्रेाग्राम्स का डिस्‍प्ले दिखाता है। यह एक आउटपुट डिवाइस है।
  2. की-बोर्ड :- इसका प्रयोग कम्प्यूटर मे टाइपिंग लिए किया जाता है, यह एक इनपुट डिवाइस है हम केवल की-बोर्ड के माध्यम से भी कम्‍प्‍यूटर को आपरेट कर सकते है।
  3. माऊस :- माऊस कम्प्यूटर के प्रयोग को सरल बनाता है यह एक तरीके से रिमोट डिवाइस होती है और साथ ही इनपुट डिवाइस होती है।
  4. सी. पी. यू.(सेन्ट्रल प्रोसेसिंग यूनिट):- यह कम्प्यूटर का महत्वपूर्ण भाग होता है हमारा सारा डाटा सेव रहता है कम्प्यूटर के सभी भाग सी. पी. यू. से जुडे रहते है। सीपीयू के अन्‍दरूनी भागों के बारे में जानें क्लिक करें। 
  5. यू.पी.एस.(अनिट्रप पावर सप्लार्इ):- यह हार्डवेअर या मशीन कम्प्यूटर बिजली जाने पर सीधे बन्द होने से रोकती है जिससे हमारा सारा डाटा सुरक्षित रहता है।

यह सारे हार्डवेयर दो भागों में बॅटे रहता है- 

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computer system concepts in hindi (कंप्यूटर सिस्टम की अवधारणा हिंदी में ) -Technology hindi Solution

July 05, 2019 0

        computer system concepts in hindi 

     (कंप्यूटर सिस्टम की अवधारणा हिंदी में )

basic concept of computer - एक या एक से अधिक उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए कार्यरत इकाइयों के समूह को एक “System” कहते हैं | जैसे – Hospital एक System है जिसकी इकाइयां (units) Doctor, Nurse, Medical, Treatment, Operation, Peasant आदि हैं | इसी प्रकार Computer भी एक System के रूप में कार्य करता है जिसके निम्नलिखित भाग हैं |

  • Hardware
  • Software
  • User


Hardware

Computer के वे भाग जिन्हें हम छु सकते है देख सकते है Hardware कहलाते हैं | जैसे-Keyboard, Mouse, Printer, Scanner, Monitor, C.P.U. etc.अगला पृष्ठ

Software

Computer के वे भाग जिन्हें हम छु नहीं सकते सिर्फ देख सकते हैं सॉफ्टवेयर (Software) कहलाते हैं| जैसे- MS Word, MS Excel, MS PowerPoint, Photoshop, PageMaker etc.

User

वे व्यक्ति जो Computer को चलाते है Operate करते है और Result को प्राप्त करते है, User कहलाते हैं|
सरल शब्दों में सारांश (Summary Words)-
  1. एक या एक से अधिक उद्देश्‍यों को प्राप्‍त करने के लिए कार्यरत इकाइयों के समूह को “सिस्‍टम” कहा जाता हैं।
  2. कम्‍प्‍यूटर के वे भाग जिन्‍हें हम छू सकते हैं तथा देख सकते हैं हार्डवेयर कहलाते हैं।
  3. कम्‍प्‍यूटर के वे भाग जिन्‍हें हम छू नहीं सकते हैं सिर्फ देख सकते हैं सॉफ्टवेयर कहलाते हैं।
  4. वे व्‍यक्ति जो कम्‍प्‍यूटर को चलाते हैं और रिजल्‍ट को प्राप्‍त करते हैं, यूजर कहलाते हैं।
  5. हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर एवं यूजर ये तीनों ही कम्‍प्‍यूटर सिस्‍टम के मुख्‍य भाग होते हैं।
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What is CPU (Functions of CPU ) in hindi

July 05, 2019 0

                What is CPU in hindi

सीपीयू कम्‍प्‍यूटर का मुख्‍य भाग होता है, इसी प्रकार सी0पी0यू0 भी कई भागों में बॅटा होता है या वह भी कई हार्डवेयरों को जोडकर बनाया जाता है, इन्‍ही हार्डवेयर भागों की गुणवत्‍ता और क्षमता पर सी0पी0यू0 की कार्यक्षमता निर्भर करती है तो आईये जाने सी0पी0यू0 के भागों के बारें में- 
What is CPU (Functions  of CPU )  in hindi

[Parts of CPU and their Functions] - 

हार्ड डिस्क:- 


यह वह भाग है जिसमें कम्प्यूटर के सभी प्रोग्राम और डाटा सुरक्षित रहते है। हार्ड डिस्क की मेमोरी स्थायी होती है, इसीलिए कम्प्यूटर को बंद करने पर भी इसमें सुरक्षित प्रोग्राम और डाटा समाप्‍त नहीं होता है। आज से 10 वर्ष पहले हार्डडिस्‍क की स्‍टोरेज क्षमता गीगाबाइट/जी0बी0 मेगाबाइट या एम0बी0 तक सीमित रहती थी किन्‍तु आजकल हार्ड डिस्क की स्‍टोरेज क्षमता को टेराबाइट या टीबी में मापा जाता है किन्तु आजकल 500 जी0बी0 तथा 1 TB या 1000 GB के क्षमतायुक्त पीसी लोकप्रिय हो गए है। हार्ड डिस्क की क्षमता जितनी अधिक होगी उतना ही ज्‍यादा डाटा स्‍टोर किया जा सकता है।

मदर बोर्ड :-

मदर बोर्ड फाइबर ग्लास का बना एक समतल प्लैटफार्म होता है, जो कम्‍प्‍यूटर के सभी हार्डवेयरों को जैसे की बोर्ड, माउस, एल0सी0डी0, प्रिन्‍टर आदि को एक साथ जोडें रखता है। मदरबोर्ड से ही प्रोसेसर, हार्डडिस्‍क, रैम भी जुडी रहती है तथा यू0एस0बी0, या पेनडाइव लगाने के लिये के भी यू0एस0बी0 पाइन्‍ट मदरबोर्ड बोर्ड में दिये गये होते हैं। साथ ही मदरबोर्ड से ही हमें ग्राफिक, तथा साउण्‍ड का आनन्‍द भी मिलता है।

सेन्ट्रल प्रासेसिग यूनिट (प्रोसेसर):- 

यह कम्प्यूटर का सबसे अधिक महत्वपूर्ण भाग है। इसमें एक माक्रोप्रोसर चिप रहता है जो कम्प्यूटर के लिए सोचने के सभी काम करता है और यूजर के आदेशेा तथा निर्देशों के अनुसार प्रोग्राम का संचालन करता है। एक तरह से यह कम्‍प्‍यूटर का दिमाग ही होता है। इसी वजह से यह काफी गरम भी होता है और इसको ठंडा रखने के लिेये इसके साथ एक बडा सा फैन भी लगाया जाता है जिसे सी0पी0यू0 फैन कहते हैं। आजकल प्रोसेसर पिन लैस आते हैं लेकिन आज से 5 साल पहले पिन वाले प्रोसेसर आते थे। इसनें सबसे प्रचलित पैन्‍टीयम 4 प्रोसेसर रहें हैं। आज के समय में इन्‍टेल कम्‍पनी के डयूलकोर और आई03 या आई07 प्रोसेसर काफी प्रचलित हैं। इन प्रोसेसरों से कम्‍प्‍यूटर की क्षमता काफी बढ जाती है।

डी0वी0डी0 राइटर :- 

यह वह भाग है जो डी0वी0डी0-राइटर डिस्क में संचित डाटा को पढता है तथा डी0वी0डी0 को राइट भी करता है जब तक डी0वी0डी राइटर नहीं आया था तक डी0वी0डी रोम चलते थे और उससे पहले सी0डी0 राइटर या सी0डी0 रोम होते थे और उससे भी पहले फ्लोपी डिस्क ड्राइव होती थी जिसमें केवल 3;4 एम0बी0 डाटा ही स्‍टोर किया जा सकता था। आजकल ब्‍लूरे डिस्‍क क भी अविष्‍कार हो चुका है जिसमें लगभग 40 जी0बी0 तक डाटा स्‍टोर किया जा सकता है। इसके लिये कम्‍प्‍यूटर में ब्‍लूरे राइटर को लगाना आवश्‍यक होगा।

रैम - 

रैम की फुलफार्म रैन्‍डम एक्सिस मैमरी होती है, रैम कम्‍प्‍यूटर को वर्किग स्‍पेस प्रदान करती यह एक प्रकार की अस्‍थाई मैमोरी होती है, इसमें कोई भी डाटा स्‍टोर नहीं होता है। जब हम कोई एप्‍लीकेशन कम्‍प्‍यूटर में चलाते हैं, तो वह चलते समय रैम का प्रयोग करती है। कम्‍प्‍यूटर में कम रैम होने की वजह से कभी कभी हैंग होने की समस्‍या आती है तथा कुछ ऐप्‍लीकेशन को पर्याप्‍त रैम नहीं मिलती है तो वह कम्‍प्‍यूटर में नहीं चलते है। रैम कई प्रकार की आती है, जैसे DDR, DDR1, DDR2 तथा DDR3 आजकल के प्रचलन में डी0डी0आर03 रैम है। रैम के बीच के कट को देखकर रैमों को पहचाना जा सकता है।

पावर सप्‍लाई :- 

कम्प्यूटर के सभी भागों को उनकी क्षमता के अनुसार पावर प्रदान करने का कार्य पावर सप्‍लाई करती है। इसको भी ठंडा रखने के लिये इसमें फैन लगा होता है। इसमें से मदरबोर्ड, हार्डडिस्‍क, डी0वी0डी0राइटर को उचित सप्‍लाई देने हेतु अलग अलग प्रकार के वायर दे रखे होते है। इसका मेन स्‍वीच सी0पी0यू0 के पीछे दिया होता है जहॉ पावर केबिल के माध्‍यम से कम्‍प्‍यूटर को पावर दी जाती है।
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What is Input Device ( इनपुट डिवाइस क्या है ) - Technology hindi solution

July 05, 2019 0

What is Input Device ( इनपुट डिवाइस क्या है )

इनपुट डिवाइस इनपुट डिवाइस इस होती हैं जिनसे कंप्यूटर में डेटा और कमांड स्‍टोर या एंटर कराया जा सकता है इनपुट डिवाइस मेन मेमोरी में स्टोर किए गए डेटा और निर्देशों को बायनरी में कन्वर्ट कर देती है आईये जानते है  इनपुट डिवाइस (Input Device) के बारे में  .
What is Input Device ( इनपुट डिवाइस क्या है ) - Technology hindi solution

इनपुट डिवाइस (Input Device)

आपका सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाने वाले इनपुट डिवाइस कीबोर्ड है जिसकी मदद से आप कंप्यूटर पर बड़े आसानी से टाइप कर पाते हैं इनपुट डिवाइस का काफी विकास हो चुका है जिनमें डाटा को टाइप करने की जरूरत नहीं पड़ती है इस प्रकार की कुछ डिवाइसेस आपका माउस है लाइट पेन है ग्राफिक टैबलेट है जॉय स्टिक है ट्रैकबॉल है और टच स्क्रीन है यह सभी डिवाइस इस यूजर को मॉनिटर स्क्रीन पर आवश्यक चीजों को सिर्फ पाइंट करके सेलेक्ट करने की स्वतंत्रता प्रदान करती हैं इसलिए इन इनपुट डिवाइस को Pointing device भी कहा जाता है आजकल तो इनपुट डिवाइस का काफी उच्च स्तर पर इस्तेमाल हो रहा है यहां तक कि आपको टाइप करने की आवश्यकता नहीं है केवल बोलने से वॉइस इनपुट रिकग्निशन टेक्नोलॉजी की सहायता से टाइप कर सकते हैं यह वह हार्डवेअर डिवाइस होती है जिसे हमें कम्प्यूटर से कोर्इ भी डाटा या कमाण्‍ड इनपुट करा सकते हैं।

कंप्यूटर हार्डवेयर सीखें हिंदी में
  • माऊस
  • की-बोर्ड
  • स्केनर
  • डी.वी.डी.ड्रार्इव
  • पेनड्रार्इव
  • कार्डरीडर 
  • माइक्रोफोन 
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What is Output Device (आउटपुट डिवाइस क्या है ) -Technology hindi solution

July 05, 2019 0

              What is Output Device  (आउटपुट डिवाइस क्या है ) 

आउटपुट डिवाइस:- आपके द्वारा दी गयी कंमाड के अाधार पर प्रोसेस की गयी जानकारी का आउटपुट कंप्‍यूटर द्वारा आपको दिया जाता है जो आपको आउटपुट डिवाइस या आउटपुट यूनिट द्वारा प्राप्‍त हो जाता है आउट डिवाइस हार्डवेयर होता है आउटपुट डिवाइस सबसे बेहतर उदाहरण आपका कंप्‍यूटर मॉनिटर है यह i/o devices कहलाती है - 
 Output Device  (आउटपुट डिवाइस ) -Technology hindi solution

आउटपुट डिवाइस (Output Device)

  • मोनीटर 
  • स्पीकर
  • प्रिन्टर
  • प्रोजेक्टर
  • हेडफोन
  • प्रिंटर  -  
    • प्रिंटर एक ऐसा आउटपुट डिवाइस (Output Device) है जो सॉफ्ट कॉपी (Soft Copy) को हार्ड कॉपी (Hard Copy) में परिवर्तित (Convert) करता हैं
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Monday, June 17, 2019

fixed and variable cost / benefit in Hindi - Technology hindi Solution

June 17, 2019 0

         fixed and variable cost / benefit in Hindi

 
fixed and variable cost / benefit in Hindi

What is fixed and variable cost / benefit (स्थिर तथा अस्थिर लागत व लाभ) :- 

सिस्टम से जुडी स्थिर लागत वह होती है जो की अपरिवर्तित रहती है ,चाहे सूचना सिस्टम को कैसे भी चलाया जाए ? इसे एक समय लगने वाली कीमत भी कहते है | 

उदाहरण के लिए कंप्यूटर हार्डवेयर को खरीदने की लागत ,सूचना सिस्टम के प्रयोग के कारण होने वाला डेप्रिसिएशन,फर्नीचर तथा बिजली की फिटिंग में होने वाले खर्च आदि | 

ठीक उसी प्रकार सूचना प्रणाली से एक ही बार मिलने वाले लाभ स्थिर लाभ की श्रेणी में आते है|

Example: नए इनफार्मेशन सिस्टम से कर्मचारियों में होने वाली कमी का लाभ आदि |अस्थिर लागत वे होती है जो बार-बार बदलती रहती है जैसे -बिजली का बिल ,मशीन के रखरखाव का खर्च आदि |  इसी तरह अस्थिर लाभ भी बार-बार बदलते रहते है |


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Sunday, June 16, 2019

cost & benefits analysis in hindi - Technology hindi Solution

June 16, 2019 0

                cost & benefits analysis in hindi

 cost & benefits analysis in hindi

what is cost benefits analysis :- 

डाटा स्टोरेज सिस्टम एनालिसिस का केवल एक अंग है | डाटा टेस्टिंग ,स्तिथि का जायजा करना ,विकल्पों पर विचार करना तथा कैंडिडेट सिस्टम निर्धारित करना अगले कदम है | प्रत्येक विकल्प की लागतो तथा लाभ से अन्यों की तुलना में किसी एक विकल्प को चयनित करने का मार्गदर्शन मिलता है | 

                         Types of Cost &Benefits analysis 

• Tangible or Intangible Cost/Benefit 
• Direct and Indirect Cost/Benefit 
• Fixed and Variable Cost/Benefit 

Tangible or Intangible Cost/Benefit (स्पर्शनीय और अस्पर्शनीय लागत व लाभ) Tangible किसी भी वस्तु का वह गुण है,जिसकी सहायता से उसकी कीमत तथा लाभ का आसानी से पता लगाया जा सकता है | Example: कंप्यूटर हार्डवेयर तथा सॉफ्टवेयर को खरीदने की कीमत,कर्मचारी का वेतन ,व्यक्तियों को दिए जाने वाले प्रशिक्षण में लगी कीमत आदि सिस्टम से संबंधित Tangible cost के उदाहरण है | इस प्रकार की लागतो को संगठन के खातो में भी नहीं लिखा जाता है |कुछ कीमतों को पहचाना भी जा सकता है , लेकिन आर्थिक मूल्यों में उन्हें रिप्रेजेंट करना कठिन होता है | इस प्रकार की लागत को Intangible cost कहते है| 

Example: नए सिस्टम में कुछ कमी के कारण इंडस्ट्री में संगठन की प्रतिष्ठा में कमी आदि| Information System से मिलने लाभ को भी Tangible तथा Intangible वर्गों में बांटा जा सकता है | लागत की तरह लाभ को भी कभी –कभी आर्थिक मूल्यों में मापना कठिन होता है,जैसे प्रबंधकीय निर्णय प्रणाली प्रणाली में सुधार,ग्राहक की बढ़ती संतुष्टि आदि | इसके अतिरिक्त कुछ लाभ Tangible होते है ,जिन्हें मापा जा सकता है | 

Example: Information system के विकास में डाटा प्रोसेसिंग की गति में तेजी ,डाटा प्रोसेसिंग की लगत में कमी आना आदि | बहुत से संगठनों में ऐसा देखा गया है कि प्रबंधक Intangible cost तथा लाभों को अनदेखा कर देते है जो की पुर्णतः गलत है, क्योकि Tangible तथा Intangible Cost &Benefits की मात्रा लगभग सामान ही होती है| 

Direct and Indirect Cost/Benefit (प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष लागत व लाभ) लागत लेखांकन के अनुसार किसी भी प्रोजेक्ट से दो तरह की लागत जुडी होती है | डायरेक्ट कास्ट वह होती है ,जिसका प्रोजेक्ट के ऑपरेशन से सीधा सम्बन्ध होता है अर्थात वे सभी खर्चे जो की सूचना सिस्टम को चलाने के लिए किये जाते जाते है , वे डायरेक्ट कास्ट की श्रेणी में आते है | 

Example: कंप्यूटर स्टेशनरी की खरीद ,सीडी की कीमत ,कंप्यूटर ऑपरेटर्स का वेतन आदि| ठीक इसी प्रकार से प्रत्यक्ष लाभ वे होते है जो की सिस्टम के ऑपरेशन से हमें सीधे प्राप्त होते है |इसके विपरीत वे लागते जो की सिस्टम के ऑपरेशन से सीधी जुडी हुई नहीं होती है, लेकिन सिस्टम को चलाए रखने के लिए खर्च की जाती है ,उसे अप्रत्यक्ष लागत कहते है| 

Example: एक कंप्यूटराइज्ड इनफार्मेशन सिस्टम बनाने में इंडस्ट्री में संगठन की छवि बढ़ती है | कंप्यूटराइज्ड सिस्टम होने के कारण कम कर्मचारियों की आवश्यकता होती है 

Fixed and Variable Cost/Benefit (स्थिर तथा अस्थिर लागत व लाभ) सिस्टम से जुडी स्थिर लागत वह होती है जो की अपरिवर्तित रहती है ,चाहे सूचना सिस्टम को कैसे भी चलाया जाए ? इसे एक समय लगने वाली कीमत भी कहते है | 

उदाहरण के लिए कंप्यूटर हार्डवेयर को खरीदने की लागत ,सूचना सिस्टम के प्रयोग के कारण होने वाला डेप्रिसिएशन,फर्नीचर तथा बिजली की फिटिंग में होने वाले खर्च आदि | ठीक उसी प्रकार सूचना प्रणाली से एक ही बार मिलने वाले लाभ स्थिर लाभ की श्रेणी में आते है|

 Example: नए इनफार्मेशन सिस्टम से कर्मचारियों में होने वाली कमी का लाभ आदि | अस्थिर लागत वे होती है जो बार-बार बदलती रहती है जैसे -बिजली का बिल ,मशीन के रखरखाव का खर्च आदि | इसी तरह अस्थिर लाभ भी बार-बार बदलते रहते है |

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Wednesday, June 12, 2019

Data Analysis in hindi ( What is the data analysis ? )- Technology hindi Solution

June 12, 2019 0

      data analysis kya hota hai  ( What is the data analysis ? )

लागत लाभ विश्लेषण (cost benefit analysis) के लिए डाटा विश्लेषण आवश्यक है | सिस्टम की जांच-पड़ताल तथा डाटा संग्रहण वर्तमान उपलब्धियों का आंकलन होता है | हमारी रूचि यह पता करने में है की कैसे कुछ कदम पूरी कार्यकुशलता के साथ संपन्न किये जाते है, कैसे वे वांछित लक्ष्यों की प्राप्ति में मदद कर सकते है तथा कैसे निर्माण की लागत सुधारी जा सकती है | डेटा विश्लेषण निर्णय को अधिक वैज्ञानिक बनाने और व्यवसाय को प्रभावी संचालन करने में मदद करता है। इसका उपयोग विभिन्न व्यवसाय, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान डोमेन में किया जा रहा है।
Data Analysis  in hindi ( What is the data analysis ? )


विश्लेषण से सिस्टम डिजाईन संबंधी आवश्यकताओं को पहचाना जाता है| आवश्यक सुधार करने के लिए कैंडिडेट सिस्टम में इन फीचर को शामिल किया जाना चाहिए |

सिस्टम की आवश्यकताए निम्नाकित है –
• बेहतर ग्राहक सेवा |
• सूचना को फिर से प्राप्त करने की तीव्र गति |
• नोटिस की त्वरित तैयारी |
• बिलिंग की बेहतर विशुद्धता |
• प्रोसेसिंग और ऑपरेटिंग में सुधार|
• स्टाफ की कार्यकुशलता में सुधार |
• त्रुटियाँ हटाने के लिए ससंगत बिलिंग प्रक्रिया |

डिजाईन सम्बन्धी इन उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए विभिन्न विकल्पों का पता करना होगा | यदि साधारणतः एक से अधिक विकल्प हो | एनालिस्ट उनमे से केवल उनका चयन करता है जो आर्थिक, तकनीकी और संचालन की द्रष्टि से उपयुक्त होते है | प्रत्येक विधि के अपने लाभ और नुकसान है |

                                           Process of Data Analysis

Data requirements
o डेटा विश्लेषण के लिए इनपुट के रूप में आवश्यक हैं, जो विश्लेषक या ग्राहकों (जो विश्लेषण के तैयार उत्पाद का उपयोग करेंगे) की आवश्यकताओं के आधार पर बनाया जाता है।

Data collection
o विभिन्न स्रोतों से डेटा एकत्र किया जाता है।
o डेटा को विभिन्न सेंसर के माध्यम से भी एकत्र किया जा सकता है, जैसे ट्रैफ़िक कैमरा, उपग्रह, रिकॉर्डिंग डिवाइस आदि।
o यह इंटरव्यू, ऑनलाइन डाउनलोड, प्रश्नावली के माध्यम से भी प्राप्त किया जा सकता है|

Data processing
o प्रारंभ में प्राप्त डेटा को विश्लेषण के लिए संसाधित या व्यवस्थित किया जाना चाहिए। उदाहरण के लिए, प्राप्त डाटा को टेबल के रूप में रखा जा सकता है जिसके लिए विभिन्न स्प्रेडशीट या डेटाबेस मैनेजमेंट सॉफ्टवेर का प्रयोग किया जा सकता है|

Data cleaning
o एक बार संसाधित और व्यवस्थित होने के बाद, डाटा अधूरा, डुप्लिकेट या उसमे त्रुटियां हो सकती हैं।
o Data cleaning इन त्रुटियों को रोकने और ठीक करने की प्रक्रिया है। सामान्य कार्यों में शामिल हैं
रिकॉर्ड मिलान (record matching)
डेटा की सटीकता की पहचान करना (identifying accuracy of data)
मौजूदा डेटा की समग्र गुणवत्ता (overall quality of existing data)
डिडुप्लीकेशन (de-duplication) – इसके अंतर्गत डाटा में से डुप्लीकेट डाटा को अलग किया जाता है|
डाटा को कॉलम में विभाजन (column segmentation)

Exploratory data analysis
o एक बार डाटा स्पस्ट या डाटा के clean हो जाने के बाद, इसका विश्लेषण किया जा सकता है।
o विश्लेषक डेटा में निहित संदेशों को समझने के लिए डेटा विश्लेषण के रूप में विभिन्न तकनीकों का प्रयोग कर सकता है।

Modeling and algorithms
o गणितीय सूत्र या मॉडल जिसे एल्गोरिदम कहा जाता है, एल्गोरिदम को चर (variable) के बीच संबंधों की पहचान करने के लिए डेटा पर लागू किया जा सकता है।

Data product
o डाटा उत्पाद एक कंप्यूटर अनुप्रयोग है जो डाटा को इनपुट के रूप में लेता है और आउटपुट उत्पन्न करता है।
o यह एक मॉडल या एल्गोरिथ्म पर आधारित हो सकता है।
o उदाहरण के लिए कोई एक एप्लीकेशन कस्टमर की पुरानी खरीदों का विश्लेषण करता है और उन्हें उनके जरूरतों के आधार पर नए प्रोडक्ट दिखता है|

Communication
o एक बार डाटा का विश्लेषण हो जाने के, उपयोगकर्ताओं को उनकी आवश्यकताओं के आधार पर कई स्वरूपों में प्रस्तुत किया जा सकता है। उपयोगकर्ताओं की प्रतिक्रिया के अनुसार इसे दुबारा अतिरिक्त विश्लेषण के लिए भेजा जा सकता है।

o विश्लेषक उपयोगकर्ताओं को डाटा को स्पष्ट रूप से और कुशलता से संवाद करने के लिए विभिन्न डाटा विज़ुअलाइज़ेशन तकनीकों का प्रयोग कर सकता है। जैसे चार्ट, टेबल इत्यादी है।

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Monday, June 10, 2019

feasibility study and its types ( feasibility study in hindi )- Technology hindi Solution

June 10, 2019 0

                    feasibility study in hindi

feasibility study  के अंतर्गत मौजूदा सिस्टम (Existing System) में थोडा सुधार करना है या पूरी तरह से नए सिस्टम का विकास करना है, इस बात पर विचार किया जाता है| Feasibility स्टडी समस्या के ओवरव्यू को समझने में मदद करती है| Feasibility स्टडी यह सुनिश्चित करने के लिए की जाती है,की प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाना है ,या पोस्टपोन करना है या केंसिल करना है |
feasibility study and its types ( feasibility study in hindi )

                feasibility study meaning

किसी भी सिस्टम की सफलता के लिए सिस्टम की क्षमता का परीक्षण करना Feasibility Study कहलाती है। Feasibility study का मुख्य उद्देश्य यह निर्धारित करना है कि सिस्टम को विकसित करना financially तथा technically रूप से संभव है या नही।

Feasibility study का उद्देश्य problem को solve करना नही होता है बल्कि यह निर्धारित करना है कि प्रॉब्लम को solve किया जा सकता है या नही।इसमें सिस्टम में आने वाली सभी समस्याओ को एनालिसिस किया जाता है, और सिस्टम की जानकारी को गहराई से जाँचा जाता है एवं यह निर्धारित किया जाता है कि सिस्टम को विकसित करने में किस प्रकार से सफलता पायी जा सकती है।

                                 feasibility study types

Feasibility study तीन प्रकार की होती है|

1. Economical Feasibility2. Technical Feasibility3. Operational Feasibility

1.Economical Feasibility: – इस फिजिबिलिटी में यह निर्धारित किया जाता है कि जो प्रस्तावित सिस्टम है उसमें कितना खर्चा आएगा तथा उसमें कितना लाभ मिलेगा? Economic Feasibility को cost benefit analysis भी कहते है।

2.Technical Feasibility:- इस फिजिबिलिटी में सिस्टम की टेक्निकल जरूरतों को निर्धारित किया जाता है। इसमें यह देखा जाता है कि जो प्रस्तावित सिस्टम है उसके लिए जो टेक्नोलॉजी चाहिए वह उपलब्ध हो तथा उस टेक्नोलॉजी को सिस्टम में किस प्रकार integrate किया जायें। नयी टेक्नोलॉजी में आने वाली सभी प्रकार की जटिलताओं को संभालने के लिए तकनीकी रूप से सक्षम एक्सपर्ट की जरुरत भी होती है।

3.Operational Feasibility:- इस फिजिबिलिटी में यह निर्धारित किया जाता है कि एक प्रस्तावित सिस्टम किस प्रकार समस्याओ का समाधान करेगा तथा सिस्टम में किस प्रकार के बदलाव आये है? इसमें यह देखा जाता है कि जो सिस्टम है क्या वह यूज़र्स के लिए लाभकारी है या नही तथा क्या वह जरूरतों को पूरा करने में सक्षम है या नही।

                         Process of Feasibility Study

फिजिबिलिटी विश्लेषण में आठ चरण शामिल किये जाते है,जो निम्नाकित है |
1. प्रोजेक्ट दल का गठन तथा प्रोजेक्ट लीडर को कार्य सौपना |
2. सिस्टम फ्लो की रचना करना |
3. संभावित कैंडिडेट सिस्टम का पता लगना |
4. कैंडिडेट सिस्टम की विशेषताओं को पहचानना एवं उनका वर्णन करना |
5. प्रत्येक कैंडिडेट सिस्टम के निष्पादन और लागत सम्बन्धी प्रभावशीलता का पता लगाना एवं गणना करना |
6. सिस्टम प्रदर्शन तथा लागत डाटा का मूल्यांकन करना |
7. सर्वश्रेष्ठ कैंडिडेट सिस्टम का चयन करना |
8. अंतिम प्रोजेक्ट डायरेक्टिव तैयार करना तथा प्रबंधन को सौपना |

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Saturday, June 8, 2019

fact-finding technique ( फैक्ट फाइंडिंग तकनीक क्या होती है ? ) - Technology hindi Solution

June 08, 2019 0

          फैक्ट फाइंडिंग तकनीक क्या होती है ?

fact-finding technique (फैक्ट फाइंडिंग तकनीक क्या होती है?),जिसमें मौजूदा दस्तावेजों, शोध, अवलोकन, प्रश्नावली, साक्षात्कार, प्रोटोटाइप का प्रयोग किया जाता है। 
fact-finding technique ( फैक्ट फाइंडिंग तकनीक क्या होती है ? )

फैक्ट फाइंडिंग तकनीक डाटा और सूचना के संग्रह की प्रक्रिया है जिसमें मौजूदा दस्तावेजों, शोध, अवलोकन, प्रश्नावली, साक्षात्कार, प्रोटोटाइप का प्रयोग किया जाता है। सिस्टम विश्लेषक मौजूदा सिस्टम को विकसित और कार्यान्वित करने के लिए उपयुक्त तथ्य-खोज तकनीकों (Fact finding techniques) का उपयोग करता है। फैक्ट-फाइंडिंग तकनीकों का उपयोग सिस्टम डेवलपमेंट लाइफ साइकिल के शुरुआती चरण में किया जाता है जिसमें सिस्टम विश्लेषण चरण, डिज़ाइन और इसके प्रयोग में लग जाने के बाद की समीक्षा शामिल है।

जब किसी सिस्टम को डेवेलप किया जाना होता है, तो पहले उस सिस्टम के बारे में बहुत सी जानकारी एकत्रित करनी होती है, जिससे उस सिस्टम का SRS (Software Requirements Specification) डॉक्यूमेंट तैयार किया जा सके| इस डॉक्यूमेंट में विकसित किये जाने वाले सिस्टम या सॉफ्टवेयर के इच्छित उद्देश्य और व्यवहार का पूर्ण विवरण होता है| इस डॉक्यूमेंट से ये भी पता चलता है कि सिस्टम क्या काम करेगा और इसका प्रदर्शन कैसा रहेगा| तो यदि हम चाहते हैं की हमारे सिस्टम का SRS डॉक्यूमेंट अच्छा बने तो हमें तथ्य खोजने की विभिन्न तकनीकों का बेहतर ढंग से प्रयोग करना पड़ेगा|

                      खोजने की तकनीक (Fact finding techniques)

मौजूदा दस्तावेजों की समीक्षा करना (Review of Records, Procedures, and Forms)
साक्षात्कार (interview)
प्रश्नावली (questionnaire)
ऑनसाइट अवलोकन (onsite observation)

मौजूदा दस्तावेजों की समीक्षा करना (Review of Records, Procedures, and Forms)

सिस्टम और संगठन से संबंधित जानकारी पहले से ही कुछ प्रकार के दस्तावेजों और रिकॉर्ड (जैसे सिस्टम यूजर मैनुअल, सिस्टम रिव्यू / ऑडिट, ब्रोशर आदि) में उपलब्ध होती है, या समाचार पत्रों, पत्रिकाओं, पत्रिकाओं आदि जैसे स्रोतों में प्रकाशित होती है। पहले से उपलब्ध दस्तावेज का अध्ययन, तथ्य और जानकारी इकट्ठा करने का सबसे तेज़ और स्वतंत्र तरीका होता है, जिसके आधार पर विश्लेषक आगे के अभ्यास के लिए प्रश्न तैयार कर सकते हैं।

मौजूदा दस्तावेजों की समीक्षा करने के लाभ

यह उपयोगकर्ताओं को संगठन या संचालन के बारे में कुछ ज्ञान प्राप्त करने में मदद करता है|
यह कम से कम समय में वर्तमान प्रक्रिया के प्रारूप और कार्यों का वर्णन करने के लिए सबसे अच्छा तरीका है क्यूंकि किसी भी उपयोगकर्ता के कार्यों के बारे में इनमे पहले से ही सही जानकारी लिखी होती है।
यह संगठन में किये गए लेनदेन, प्रोसेसिंग के लिए इनपुट की पहचान और प्रदर्शन का मूल्यांकन करने के बारे में एक स्पष्ट समझ प्रदान कर सकता है।
यह एक विश्लेषक को संचालन के संदर्भ में प्रणाली को समझने में मदद कर सकता है|
यह समस्या, इसके प्रभावित भागों और प्रस्तावित समाधान का वर्णन करता है।

साक्षात्कार (interview)

इस विधि का उपयोग समूहों या व्यक्तियों से जानकारी एकत्रित करने के लिए किया जाती है। विश्लेषक उन लोगों का चयन करता है जो साक्षात्कार के लिए सिस्टम से संबंधित हैं। इस पद्धति में विश्लेषक लोगों के साथ आमने-सामने बैठता है और उनकी प्रतिक्रियाओं को रिकॉर्ड करता है जिसके द्वारा विश्लेषक मौजूदा प्रणाली, उसकी समस्या और प्रणाली के बारे में सीखते हैं। साक्षात्कार कर्ता को पहले से ही इस प्रकार के प्रश्नों की योजना बनानी चाहिए जो वह पूछने जा रहा है और किसी भी प्रकार के प्रश्न का उत्तर देने के लिए तैयार होना चाहिए।

इंटरव्यू के द्वारा एकत्रित की गई जानकारी काफी सटीक और विश्वसनीय होती है, क्योंकि इसमें साक्षात्कार कर्ता स्वयं वहां मौजूद होता है और किसी संदेह की स्थिति में तुरंत नयी जानकारी प्राप्त कर सकता है। यह विधि गलतफहमी के क्षेत्रों को दूर करने और भविष्य की समस्याओं के बारे में चर्चा करने में मदद करती है।

                                     इंटरव्यू के दो प्रकार हो सकते हैं

असंरचित साक्षात्कार (Unstructured Interview) – सिस्टम एनालिस्ट सिस्टम की बेसिक जानकारी हासिल करने के लिए सवाल-जवाब बैठक आयोजित करता है।

संरचित साक्षात्कार (Structured Interview) – इसमें मानक प्रश्न होते हैं जिसके अंतर्गत उपयोगकर्ता को वर्णनात्मक या ऑब्जेक्टिव प्रारूप में जवाब देने की आवश्यकता होती है। जिसे हम ओपन सेशन और क्लोज सेशन भी बोल सकते हैं|

साक्षात्कार के लाभ

यह विधि अक्सर विशिष्ट जानकारी इकट्ठा करने का सबसे अच्छा स्रोत है।
यह उनके लिए उपयोगी है, जो लिखित रूप में प्रभावी ढंग से संवाद नहीं कर पाते हैं या जिनके पास                    प्रश्नावली को पूरा करने का समय नहीं है।
जानकारी को आसानी से मान्य किया जा सकता है और तुरंत क्रॉस चेक किया जा सकता है।
इसके जरिये जटिल विषयों के बारे में भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है|
किसी की राय मांगकर महत्वपूर्ण समस्या का पता लगाना आसान होता है।
यह गलतफहमी को कम करता है और भविष्य में होने वाली समस्याओं को कम करता है।

प्रश्नावली (questionnaire)

इस विधि के जरिये लिखित और निर्धारित प्रारूप में व्यक्ति से जानकारी मांगी जाती है। यह जानकारी इकट्ठा करने का एक तेज़ तरीका है यदि उत्तरदाता भौगोलिक रूप से अलग अलग जगह पर हैं या साक्षात्कार के लिए ज्यादा समय नहीं है। इसके अंतर्गत प्रश्न किसी भी प्रकार के हो सकते हैं: संरचित या असंरचित। संरचित प्रश्न में उत्तर YES / NO के रूप में, कई विकल्पों में से एक विकल्प का चयन, रेटिंग, रिक्त स्थान आदि के रूप में हो सकते हैं| वहीँ असंरचित प्रश्न में किस व्यक्ति से उसकी राय पूछी जा सकती है और वह स्वतंत्र रूप से इसका उत्तर दे सकता है।

प्रश्नावली के लाभ

• यह उपयोगकर्ताओं के हितों, दृष्टिकोण, भावनाओं और विश्वास के सर्वेक्षण में बहुत प्रभावी है जो सह-स्थित            नहीं  हैं।
• किसी स्थिति में यह जानना उपयोगी है कि दिए गए समूह के किस अनुपात में प्रस्तावित प्रणाली की किसी           विशेषता का अनुमोदन या अस्वीकृति है।
• सिस्टम प्रोजेक्ट को कोई विशिष्ट दिशा देने से पहले समग्र राय निर्धारित करना उपयोगी होती है।
• यह अधिक विश्वसनीय होता है क्यूंकि इसमें उत्तरदाताओं की ईमानदार प्रतिक्रियाओं की उच्च गोपनीयता होती    है।
• यह तथ्यात्मक जानकारी का चुनाव करने और सांख्यिकीय डेटा संग्रह के लिए उपयुक्त है जिसे ईमेल और डाक द्वारा भेजा जा सकता है।

ऑनसाइट अवलोकन (onsite observation)

इस तकनीक में, विश्लेषक संगठन में भाग लेता है, दस्तावेजों के प्रवाह का अध्ययन करता है, मौजूदा प्रणाली को लागू करता है, और उपयोगकर्ताओं के साथ बातचीत करता है। अवलोकन एक उपयोगी तकनीक हो सकती है क्यूंकि इसमें विश्लेषक उपयोगकर्ता के दृष्टिकोण को समझ पाता है। इस तकनीक का उपयोग करके, सिस्टम विश्लेषक यह जान सकते हैं कि कर्मचारी अपना दिन किन किन कार्यों की करने में बिताते हैं।

ऑनसाइट अवलोकन के लाभ

यह जानकारी प्राप्त करने का एक सीधा तरीका है।
यह उस स्थिति में उपयोगी है जहां एकत्र किए गए डेटा की प्रामाणिकता सवाल में है या जब सिस्टम के                कुछ पहलुओं की जटिलता उपयोगकर्ताओं द्वारा अच्छे से स्पष्ट नहीं की जा पा रही है।
यह अधिक सटीक और विश्वसनीय डाटा का उत्पादन करता है।

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Thursday, June 6, 2019

what is initial investigation in hindi - Technology hindi Solution

June 06, 2019 0

         what is initial investigation in hindi

explain initial investigation in hindi - 

System development life cycle का पहला चरण आवश्यकताओं का पता लगाना  है | सिस्टम में बदलाव, उपस्थित सिस्टम में वृद्धि प्रयोगकर्ता की मांग होती है | प्रारंभिक परीक्षण प्रयोगकर्ता की आवश्यकताओं को जानने की एक मानक रूपरेखा है जिसका उद्देश्य यह जानना है की प्रयोगकर्ता की मांग उपयुक्त और संभव है या नहीं |
what is initial investigation in hindi
what is initial investigation in hindi

प्रयोगकर्ता का मांगपत्र निम्न जानकारी प्रस्तुत करता है-
प्रयोगार्थी द्वारा कार्य को दिया गया मुख्यप्रष्ठ
कार्य का तरीका
कार्य दिए जाने की तिथि
कार्य पूर्ण होने की तिथि
कार्य का उद्देश्य
इनपुट /आउटपुट का वर्णन
मांगने वाले का नाम ,संकाय ,फ़ोन नंबर और हस्ताक्षर
स्वीकृत करने वाले व्यक्ति का नाम हस्ताक्षर संकाय और फ़ोन नंबर प्रयोगकर्ता की मांग बदलाव की आवश्यकता को प्रस्तुत करता है

अंतिम लिखित वचनबद्धता के पहले कई बदलावों की आवश्यकताओं होती है | मांग की स्वीकृति के बाद बैकराउंड टेस्टिंग ,फैक्ट फाइंडिंग एनालिसिस और परिणाम का प्रस्तुतिकरण जैसे कार्य किये जाते है ,जिन्हें प्रोजेक्ट प्रपोजल कहते है | प्रपोजल की स्वीकृति के बाद सिस्टम क्वालिटी का प्रयोगकर्ता द्वारा निर्धारित विशिष्ट वर्णन और सिस्टम की संभावना का विश्लेषण प्रारंभ होता है |

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Wednesday, June 5, 2019

System Development Life Cycle | SDLC क्या है - Technology hindi Solution

June 05, 2019 0

  System Development Life Cycle |  SDLC क्या है 

SDLC का पूरा नाम System development life cycle है ।  SDLC एक सूचना प्रणाली (Information system) के जीवन चक्र (life cycle) की व्याख़्या करता है। डेटाबेस डिज़ाइन SDLC का एक मूलभूत घटक है। किसी भी सिस्टम को बनाने में जो प्रक्रिया होती है उस प्रक्रिया को System development life cycle (SDLC) कहते है।

System Development Life Cycle |  SDLC क्या है
सिस्टम डेवलपमेंट एक birth to mature प्रोसेस है किसी सिस्टम को बनाने के निम्न चरण होते है।
Preliminary investigation
Feasibility Study
Requirement Analysis
System Analysis
System design
Software Development
Testing
Implementation
Maintenance
Review

1. Preliminary investigation:- सिस्टम डेवलपमेंट लाइफ साइकिल का पहला चरण सिस्टम की वास्तविक समस्या का पता लगाना है सिस्टम में प्रॉब्लम को जाने बिना आगे कोई भी काम करना प्रयास को निष्फल करना है | किसी भी सिस्टम में समस्या यूजर की आवश्यकताओं को परिभाषित करती है | इस चरण में सिस्टम एनालिस्ट समस्या का पता लगाता है सिस्टम से हमें क्या पाना है या उसके क्या लक्ष्य है डिस्कस करते है। इस चरण में हम यह देखते है कि जो वर्तमान सिस्टम है वह अपना काम सही तरीके से कर रहा है या नही। अगर वह सही तरीके से अपना काम कर रहा है तो उसे बदलने की कोई जरूरत नही है।

2. Feasibility Study:- फिजिबिलिटी स्टडी के अंतर्गत मौजूदा सिस्टम (Existing System) में थोडा सुधार करना है या पूरी तरह से नए सिस्टम का विकास करना है,इस बात पर विचार किया जाता है| फिजिबिलिटी स्टडी समस्या के ओवरव्यू को समझने में मदद करती है| फिजिबिलिटी स्टडी यह सुनिश्चित करने के लिए की जाती है ,की प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाना है ,या पोस्टपोन करना है या केंसिल करना है |

3. System Analysis:- सिस्टम एनालिसिस सिस्टम डेवलपमेंट लाइफ साइकिल का सबसे महत्वपूर्ण चरण है |पहले चरण में समस्या को परिभाषित किया जाता है, तथा इस चरण में उन समस्याओ की और अधिक अधिक गहराई के साथ जांच की जाती है। इस चरण में यूजर की आवश्यकताओं को देखा जाता है, कि end users की क्या-क्या जरूरतें है। इस चरण में सिस्टम के हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर का अच्छी तरह से अध्यन किया जाता है। इसमें end users तथा डिजाईनर दोनों मिलके समस्याओ को हल करते है।

4. System design:- इस चरण में डिज़ाइनर सिस्टम के प्रोसेस के डिज़ाइन को पूरा करता है। सिस्टम में सम्पूर्ण तकनीकी निर्देश (technical specifications) को शामिल किया जाता है जिससे सिस्टम और भी ज्यादा इंटरैक्टिव तथा कुशल बन जाएँ।

5. Software Development:- सिस्टम डिजाईन करने के बाद सॉफ्टवेयर या प्रोग्राम बनाना SDLC का अगला चरण है |डेवलपमेंट वह चरण है जहाँ सिस्टम डिजाईन के अनुसार प्रोग्रामर प्रोग्रामकी कोडिंग करता है  अर्थात  इस चरण में सिस्टम वास्तविक रूप में परिवर्तित होता है|

7.Testing:- इस चरण में सिस्टम की टेस्टिंग की जाती है  इससे पहले की डेटाबेस डिज़ाइन को इम्प्लीमेंट किया जाएं सिस्टम को  टेस्टिंग,कोडिंग, तथा debugging प्रोसेस से होकर गुजरना पड़ता है। SDLC में यह सबसे लम्बे समय तक चलने वाला चरण  है।

6. Implementation:- इस चरण में, हार्डवेयर, DBMS सॉफ्टवेयर तथा एप्लीकेशन प्रोग्राम्स को इन्स्टाल किया जाता है तथा डेटाबेस डिज़ाइन को इम्प्लीमेंट किया जाता है।

7. Maintenance:-  जब सिस्टम बनके तैयार हो जाता है तथा यूजर उसका प्रयोग करना शुरू कर देते है तब जो भी समस्या उसमें आती है उनको समय-समय पर हल करना पड़ता है। तैयार सिस्टम का  समय के अनुसार ख्याल रखना ही मेंटेनेंस कहलाता है।

8.Review:-जब सिस्टम को इम्प्लीमेंट कर दिया जाता है तब यूजर से उसके बारे में रिव्यु लिए जाते की सिस्टम यूजर की आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम है या नहीं |

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Sunday, June 2, 2019

Elements of system in hindi - Technology hindi Solution

June 02, 2019 0

               Elements of system in hindi

एक सिस्टम का उद्देश्य आउटपुट देना होता है | सिस्टम इनपुट लेता है,और उस पर प्रोसेस करके आउटपुट उत्पन्न करता है |इनपुट डाटा जब आउटपुट के रूप में अर्थात सूचना प्रक्रिया (information processing) के लिए बाहर आता है ,उसके लिए उसे प्रक्रिया में शामिल करना होता है | आउटपुट को प्राप्त करने के लिए हम इनपुट देते है |इस इनपुट पर प्रक्रिया की जाती ,और हमे परिणाम मिलता है | सिस्टम के  तत्व (element) निम्नलिखित है |

·         Input and Output
·         Process
·         control
·         Feedback

Elements of system in hindi
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Input and Output : किसी भी सिस्टम का आउटपुट यूजर के लिए महत्वपूर्ण होता है |किसी भी सिस्टम में इनपुट उस सिस्टम में इनपुट उस सिस्टम के आउटपुट के अनुसार ही दिया जाता है |किसी सिस्टम की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए जिन आकड़ो की आवश्यकता होती है ,उसे इनपुट कहते है ,और इस प्रक्रिया के बाद प्राप्त सूचना को आउटपुट कहते है |

Process : किसी भी डाटा को प्रोसेस के बाद सूचना में बदलना सबसे महत्वपूर्ण कार्य है ,किसी सिस्टम के इनपुट को आउटपुट में बदलना process कहलाता है |

Control : किसी सिस्टम प्रक्रिया को नियंत्रण में रखने की क्रिया Control कहलाती है |

Feedback : जब कोई सिस्टम काम कर रहा होता है तो उसके कार्य की विवेचना Feedback कहलाती है |

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