Technology Hindi Solution: Windows Commands

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Thursday, September 13, 2018

What is PowerShell in Hindi - Technology Hindi Solution

September 13, 2018 1

i am parthik thakur 

welcome to technogloy  website


                           विंडोज पॉवरशेल

PowerShell को समझने से पहले आपको Shell के बारे मे पता होना जरुरी है | Computing मे shell एक super interface है जिसकी help से OS की services access की जा सकती है | Generally operating system, shells services access करने के लिए या तो command-line interface (CLI) या फिर GUI use करती है | 

इसको shell इसलिए कहा जाता है क्योकि ये computer operating system kernel के ऊपर की layer होती है | Windows PowerShell Microsoft के द्वारा develop की गयी वो shell है जिसकी help से task automation and configuration management किया जा सके | PowerShell मे, command line shell and scripting language दोनों बहुत important है एवं दोनों की अपनी उपयोगिता है |
                               

वैसे तो Windows का Graphical user interfaces बहुत easy and understanding होता है लेकिन Users task को complete करने के लिए पूरी तरह से इस बात पर depend करता है की उसको task perform करने की steps पता है या नहीं | Operating systems users को graphical representation provide करता है जहाँ पर वह drop-down menu या फिर context menu को use करके items browse या फिर context -specific functionality perform किये जा सकते है | 

GUI की तुलना मे command-line interface (CLI) जैसे की Windows PowerShell, information को browse करने के लिए या task perform करने के लिए दूसरी approach use करती है क्योकि इसमें कोई GUI नहीं होता है, आपको task perform करने के लिए पूरी तरह से command names और उनके syntax पर depend on होना पड़ता है लेकिन Powershell की सबसे अच्छी खास बात है की ये interactive होती है और आप एक छोटा सा command type करके बहुत सारी information retrieve करने के साथ complex task एक single command मे perform कर सकते है |
Windows PowerShell एक task-based command line, automation platform and scripting language features वाली interactive object-oriented command environment language है जो की छोटे programs को बड़े बड़े task perform करने के लिए use की जा सकती है एवं system administrator के task, easy करने के लिए design की गयी है | इसकी help से windows server system task management easy ho जाता है | Microsoft Windows PowerShell, एक object-oriented programming language and interactive command line शैल है जो की Dot Net framework मे बना है इसलिए ही यह windows environment को control करने के लिए rich objects and बहुत अच्छे built-in functionality provide करता है | IT professionals and power users के लिए Windows PowerShell एक ऐसा tool है जो की windows OS and windows applications के administration को control and automate करने मे help करता है |
PowerShell को system task automate करने के लिए design किया गया था जैसे की batch processing task, common task के लिए systems management tools create करना etc | PowerShell language Perl language से मिलती हुई language है | PowerShell मे अलग अलग functions के लिए 120 से ज्यादा standard command line tools होते है जिनको create करने के लिए users पहले VB, VBScript or C# use करके script बनाते थे | 
यहाँ पर एक बात ध्यान मे रखने की है की Windows PowerShell एक .NET Framework application है | यह कोई super tool नहीं जिसके user कोई भी operation perform कर सकता है | इसमें एक user PowerShell का use करते हुए केवल वो ही operation perform कर सकता है जिसके rights उसके पास हो जिससे की अगर user के पास device drivers install करने के rights नहीं है तो वो user ऐसे कोई script नहीं run कर सकता जिससे की device drivers install किया जा सके |
Powershell के commands बहुत simple, understanding and logical होते है जैसे की एक command Get-Process है | इसका मतलब मुझे information चाहिए (get) | इसलिए command start होता है get से उसके बाद मुझे process की information चाहिए इसलिए second part मे process – get-process | इस प्रकार एक बार आप commands का use करने लग जाते है तो आपके लिए commands को समझना और याद करना easy ho जाता है |
PowerShell के अलग अलग features मे से Cmdlets सबसे जयदा use आने वाला या फिर कह सकते है की यह PS का heart and soul होता है जिस पर आप commands execute कर सकते है |

Windows PowerShell features –
Cmdlets – ये specialized commands होते है जिसकी help से common system administration tasks perform किये जा सकते है -registry managing task, services, processes, event logs etc.
PowerShell Scripts – यह task-based scripting language होती है जो की existing scripts and command-line tools को support करती है | Script language variables, functions, branching (if-then-else), loops (while, do, for, and reach), structured error/exception handling को support करती है | PowerShell मे लिखी गयी script .ps1 file या psm1 file मे save की जाती है |
Consistent design- cmdlets and system data stores common syntax and naming conventions को use करते है इसलिए data को easily share किया जा सकता है | एक cmdlet का output दूसरे cmdlet मे बिना किसी manipulation or formatting के as input use किया जा सकता है |
Powerful object manipulation capabilities – Objects can be directly manipulated or sent to other tools or databases.
PowerShell Versions: Windows PowerShell का first version PowerShell 1.o Nov 2006 मे Windows के Operating systems के साथ release किया था एवं उसके बाद PowerShell 2.0, 3.0, 4.0 and latest version PowerShell 5.o release किये जा चुके है |
Windows XP, Windows Server 2003 and Windows Vista के लिए PowerShell का free version download किया जा सकता है | Windows 7 and Windows server 2008 के लिए PowerShell as built-in feature है जिसको की optionally install किया जा सकता है |
PowerShell मे generally administrative tasks cmdlets पर perform किये जाते है –
Few Popular Cmdlet commands –
Get-ChildItem – List all files/directories in the (current) directory
Test-Connection – Sends ICMP echo requests to specified machine from the current machine, or instructs another machine to do so
Get-Content – Get the content of a file
Get-date
Get-Item – Item specified by the parameter ou give
Get-Command – Get the content of a file
Get-Help – List available commands
Clear-Host – Clear the screen
Copy-Item – Copy one or several files / a whole directory tree
Move-Item – Move a file / a directory to a new location
Remove-Item – Delete a file / a directory
Rename-Item – Rename a file / a directory
Get-Location – Display the current directory/present working directory.
Pop-Location – Change the current directory to the directory most recently pushed onto the stack
Set-Location Change the current directory
Tee-Object – Pipe input to a file or variable, then pass the input along the pipeline
Write-Output – Print strings, variables etc. to standard output
Get-Process – List all currently running processes
Stop-Process – Stop a running process
Set-Variable – Set the value of a variable / create a variable


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Sunday, July 22, 2018

प्रिंटर क्‍या है ? प्रिंटर खरीदते वक्त क्या क्या बातों का ध्यान रखना चाहिए- Technology Hindi Solution

July 22, 2018 0

i am parthik thakur 

welcome to technogloy  website

प्रिंटर खरीदते वक्त क्या क्या बातों का ध्यान रखना चाहिए Explain different type of Printers

Printers Kya hota hai : प्रिंटर एक external output डिवाइस है जो की कंप्यूटर से डाटा इनपुट लेती है एंड इसका आउटपुट हार्ड कॉपी की फॉर्म मे मतलब पेपर पर प्रिंट करके देती है| प्रिंटर डिवाइस इनपुट मे टेक्स्ट एंड ग्राफ़िक कंटेंट accept कर सकती है एंड accept की गयी इनफार्मेशन को पेपर पर print कर सकती है| अगर आपका प्रिंटर ब्लैक एंड वाइट है but इनपुट color है तो भी आउटपुट मे ब्लैक एंड वाइट ही प्रिंट होगा जबकि कलर प्रिंटर होने पर आउटपुट मे वही प्रिंट होगा जो की आप इनपुट मे देंगे| अलग अलग प्रिंटर्स की अलग अलग size, speed, memory एवं cost हो सकती है और actual कॉस्ट depend करती है की उसके features क्या क्या है| जितना महंगा प्रिंटर होगा उसकी memory, speed and resolution भी उतना ही अच्छा होगा|




जो प्रिंटर्स हाई DPI (dots per inch) सपोर्ट करते है उनकी प्रिंटिंग क्वालिटी low DPI printer की तुलना मे ज्यादा अच्छी होती है क्योकि high resolution मे डॉक्यूमेंट को प्रिंट कर सकते है। ज्यादातर प्रिंटर कम्प्यूटर्स से कनेक्ट हो कर use किये जाते है जबकि बहुत सारे प्रिंटर्स business purpose के लिए केवल copying मशीन के लिए भी काम मे लिए जाते है| प्रिंटर्स को कंप्यूटर से कनेक्ट करने के आलावा डिजिटल कैमरा से भी कनेक्ट करके डॉक्यूमेंट प्रिंट किया जा सकता है|
आपने हार्डकॉपी टर्म तो बहुत सुनी होगी तो क्या आप जानते है इसका मतलब क्या होता है। यहाँ पर हम आपको बता दे की generally यह टर्म प्रिंटेड पेपर के लिए use की जाती है। जब कोई प्रिंटर पेपर पर प्रिंट करता है तो उस कॉपी को हार्ड कॉपी कहते है जो की एक सॉफ्ट कॉपी का या इलेक्ट्रॉनिक डॉक्यूमेंट का फिजिकल version होता है।
2 D and 3 D Printers : अभी कुछ समय पहले तो केवल 2 D printers ही काम मे आते थे लेकिन टेक्नोलॉजी के बढ़ने के साथ साथ 3 D प्रिंटर भी पॉपुलर होते जा रहे है| 2 D printers तो वो सभी प्रिंटर्स है जो हम इतने सालो से देखते आ रहे है एंड पेपर पर डॉक्यूमेंट को प्रिंट करने के लिए काम मे लेते है लेकिन 3 D प्रिंटर्स से अलग अलग तरह की shape डिज़ाइन करने के लिए काम मे लिए जाते है| 3 D printer का use करके कंप्यूटर से किसी image file को three dimensional सॉलिड ऑब्जेक्ट्स की शेप मे प्रिंट करते हुए बनाया जा सकता है| चलिए यहाँ पर हम आपको बताते है की 2 D प्रिंटर कितने तरह के होते है|
It can be classify in two main category –
Impact printers: ये प्रिंटर्स electro-mechanical मैकेनिज्म का उपयोग करते हुए प्रिंट करते है जिसमे की प्रिंटर के pins, रिबन एंड पेपर पर strike करते हुए print करते है। es वजह से ये प्रिंटर, प्रिंटिंग के समय आवाज करते है। Example of Impact Printers – Line, Dot Matrix, Drum, daisy wheel printers|
Non-impact printers : ये प्रिंटर्स इम्पैक्ट प्रिंटर्स की तुलना मे ज्यादा शांत होते है एवं प्रिंटिंग करते वक़्त आवाज नहीं करते क्योकि इसमें Pins स्ट्राइक करने जैसा कुछ नहीं होता। इस तरह के प्रिंटर की क्वालिटी एवं स्पीड ज्यादा अच्छी होती है। Examples of Non impact Printers – Ink Jet, Laser Printers|
प्रिंटर खरीदते वक्त क्या क्या बातों का ध्यान रखना चाहिए-
  1. प्रिंटर मेमोरी : अगर आपके प्रिंटर की मेमोरी ज्यादा होगी तो आप बड़ी files जिसमे images, tables या rich कंटेंट हो वो easily प्रिंट कर सकते है| इसलिए प्रिंटर लेने से पहले इसकी memory जरूर चेक कर लेनी चाहिए|
  2. Resolution – प्रिंटिंग क्वालिटी प्रिंटर के resolution के ऊपर depend करती है इसलिए आपको देख लेना चाहिए की प्रिंटर कितना resolution support कर सकता है|
  3. Color or Black & white Printer : आपको आपकी जरूरत के अनुसार Printer choose krna chahiye |
  4. Printing Cost – जब आप प्रिंटर लेते है तो ये जानना जरुरी है की हर page प्रिंट करने पर कितनी कॉस्ट आती है| इसके लिए printer cartridge की cost पता करनी चाहिए |
  5. Number of pages it can print in a single cartridge – एक cartridge मे प्रिंटर कितने पेज प्रिंट कर सकता है ये जानने से आपको printing कॉस्ट निकालने मे आसानी होगी|
  6. Cost to refile cartridge – एक बार cartridge खाली हो जाती है तो उसको riffle करने की cost क्या आती है ये जानना बहुत जरुरी है|
  7. Printer Network प्रिंटर है या नहीं – अगर आप चाहे तो प्रिंटर को नेटवर्क या wifi से कनेक्ट करके भी प्रिंट ले सकते है| इसलिए अपनी जरुरत के हिसाब से ये देखना जरुरी है की आपको printer मे नेटवर्क चाहिए या नहीं|
  8. प्रिंटर स्पीड – प्रिंटर स्पीड जितनी ज्यादा होगी प्रिंटर उतनी ही फ़ास्ट स्पीड से पेपर प्रिंट कर सकेगा|
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