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Wednesday, August 21, 2019

नींद के बारे में कुछ दिलचस्प तथ्य क्या है

August 21, 2019 0

          नींद के बारे में कुछ दिलचस्प तथ्य क्या है


वर्ष 1998 में एक प्रयोग किया गया जिसमें पाया कि अगर मनुष्य के घुटनों के पीछे एक तेज लाइट लगा दी जाती है तो इससे दिमाग की नींद-जागने की घड़ी अलग तरीके से काम करने लगती है। प्रत्येक रात को अगर आप सात घंटे से कम की नींद लेते हैं तो इससे आप की जीवन प्रत्याशा समाप्त हो जाती है। एक समय पर डॉल्फिन का केवल आधा दिमाग ही सो पाता है।
कुछ ‍बधिर लोगों को नींद में भी साइन लैंग्वेज का प्रयोग करते देखा जा सकता है। अगर आप एक सप्ताह तक नहीं सोते हैं तो आपका दो पौंड्‍स (900 ग्राम) तक बढ़ जाता है। दुनिया में अलार्म घड़ियों के आने से पहले ब्रिटेन में 'नौकर्स अप' होते थे जोकि एक लम्बे बांस को ग्राहक की खिड़कियों पर तक ठोंकते थे जब तक कि वे जाग नहीं जाते थे।
एक घोंघा लगातार तीन साल तक सो सकता है। सोते समय छींक आना लगभग असंभव है। आदमी खाना खाए बिना दो माह तक जिंदा बना रह सकता है लेकिन वह बिना नींद के मात्र 11 दिनों तक ही जीवित रह सकता है।जापान में काम करते समय अगर आपको नींद आ जाती है तो माना जाता है कि कड़ी मेहनत से आई थकान के कारण आप सो गए होंगे।

                     नींद के बारे में कुछ 

  1. आज तक ऐसा कोई जवाब नहीं मिला जिससे पता चले हम सोते क्यों हैं।
  2. इंसान अपने जीवन का एक तिहाई हिस्सा, यानि लगभग 25 वर्ष, सोने में गुजार देता हैं।
  3. जब तक बच्चा 2 साल का होता हैं तब तक बच्चे के मां-बाप उसकी वजह से 1055 घंटे कम सोते हैं।
  4. सोते वक्त अगर आप के दिमाग को लगता है की आप किसी खतरे में नही हैं तो वे उन आवाजो को छानकर निकाल देता है जो आप को नींद से जगा सकती हैं।
  5. जब आपकी नींद Alarm बजने से थोड़ी देर पहले खुल जाती हैं तो उसे “Circadian Rhythm” कहते हैं।
  6. कभी-कभी जब हम सोने की कोशिश कर रहे होते हैं, तो घडी की टिक-टिक से भी हमें बहुत गुस्सा आता हैं।
  7. अक्सर हम दोपहर के 2.00 बजे और रात के 2.00 बजे सबसे ज्यादा थकान महसूस करते हैं।
  8. अकसर जो लोग ज्यादा नहीं सोते उनके harmons का स्तर जल्दी गिरता हैं।
  9. सबसे ज्यादा समय तक लगातार जागने का रिकार्ड 1964 में 17 साल के Randy Gardner ने बनाया था. वह 264 घंटे 12 मिनट तक जगा रहा.
  10. अगर आप किसी सपने से जाग गए हैं और वापस उस सपने को देखना कहते हैं तो आपको जल्दी से आंखे बंद करके सो जाना चाहिये बिलकुल सीधा होकर. ये तरीका हर बार काम नहीं करता पर आप एक अच्छा सपना जरूर देख पाएंगे.
  11. आपको जानकर हैरानी होगी कि 15% जनसंख्या को नींद में चलने की और 5% जनसंख्या को नींद में बोलने की बीमारी हैं।
  12. हर 4 शादीशुदा जोड़ो में से एक जोड़ा ऐसा हैं, जो अलग-अलग बेड पर सोता हैं।
  13. जब आप खुश होते हैं तो कम नींद में काम चल जाता हैं।
  14. महात्मा गांधी अपनी इच्छा अनुसार सोते और जाग सकते थे। उन्हें गहरी नींद के लिए पांच मिनट का समय ही काफी था।
  15. सुबह 3:00 से 4:00 बजे के बीच आपका शरीर सबसे कमज़ोर होता हैं. यही कारण है कि ज़्यादातर लोगों की नींद में मृत्यु इसी समय होती हैं.
  16. “Bruxism” उसे कहते हैं जब हम नींद में अपने दांत किट किटाने लगते हैं।
  17. 1998 में किये गए एक experiment से पता चलता है कि घुटनों के पीछे, तेज प्रकाश पड़ने से दिमाग में चलने वाली नींद और चेतना की घड़ी reset हो जाती हैं।
  18. सोते समय छींक मरना असंभव हैं।
  19. हम बिना खाए 2 महीने तक जीवित रह सकते हैं, लेकिन बिना सोये केवल 11 दिन तक जीवित रह सकते हैं।
  20. जापान में काम करते करते सो जाना मान्य है क्योकि इसे कड़ी मेहनत करते हुए थक जाना समझा जाता है।
  21. “Dysania” वह हालत हैं, जब सुबह बिस्तर से उठना बहुत कठिन काम लगता हैं।
  22. बिल्लियाँ अपने जीवन का 70% भाग सोने में बिताती हैं।
  23. घोड़ा खड़ा होकर और खरगोश अपनी आँखे खोल कर सोता हैं।
  24. 1849 में, “David Atchison” अमेरिका के एक दिन के president बने, और उन्होंने अपना ज्यादातर समय सोने में बिता दिया।
  25. आप टेलिविजन देखने से ज्यादा कैलोरी सोने में खर्च करते हो।
  26. मैनें सपने में मकड़ी खाई.. ये एक झूठ हैं क्योकिं सपने में मकड़ी खाने के चांस 0% हैं।
  27. अमेरिका के 8% लोग नंगे सोते हैं।
  28. दुनिया में मनुष्य ही ऐसा जीव हैं जो अपनी इच्छा से सो सकता हैं.
  29. सोते समय साँस छोड़ते वक्त हमारा वजन एक पौंड यानि 450 ग्राम तक कम हो जाता है।
  30. जब पूरा चाँद निकलता है तो इंसान कम सोता है इसके लिए आप पर्यावरण को जिम्मेदार ठहरा सकते हों।
  31. जब दुनिया में कलर टीवी नहीं था, तब लगभग 80% जनसँख्या को सपने भी काले और सफ़ेद आते थे.
  32. जो लोग सपने नहीं देखते उन्हें “Personality Disorders” नामक बीमारी होती हैं।
  33. “Parasomnia” एक ऐसी बीमारी हैं, जिसमें आदमी नींद में ही हत्या जैसा संगीन जुर्म कर सकता हैं।
  34. जब डोल्फिन और व्हेल सो रही होती है तब भी उनका आधा दिमाग जागता रहता हैं, उन्हें याद दिलाने के लिए कि हवा लेने सतह पर कब जाना हैं।
  35. रात को सोते वक्‍त हम अपनी सूंघने की क्षमता खो बैठते हैं, जिससे अगर घर पर कोई गैस लीक हो रही हो या फिर धुएं की महक आए तो हमें पता ही नहीं चल पाता।
  36. अगर आप 16 घंटे तक लगातार जागते हैं तो आपका दिमाग ऐसा महसूस करेगा जैसे आपके खून में 0.5% अल्कोहल होने पर करता हैं।
  37. यदि आपने पूरी नींद नही ली तो आप बाॅडी में लैप्टिन की कमी होने के कारण आप ज्यादा खाना खाएंगे.
  38. कभी-कभी अधिक ऊंचाई के कारण भी नींद नही आती।
  39. “Sleep Apnea” एक ऐसी बीमारी हैं जब सोते वक्त साँस रूक जाता हैं इसके कारण आदमी सोने से डरता हैं और हमेशा तनाव में रहता हैं।
  40. अगर आप रात को 7 घंटे से कम सोते हैं तो जुकाम होने की संभावना 3 गुणा बढ़ जाती हैं।
  41. नींद न आने का सबसे बड़ा कारण 24 घंटे Internet चलाना है।
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Sunday, August 18, 2019

चिकन खाने के बाद हम दूध क्यों नहीं पी सकते ?

August 18, 2019 1

  चिकन खाने के बाद हम दूध क्यों नहीं पी सकते ?


दूध और चिकन दोनों में ही कैसिईन प्रोटीन बहुत प्रचुर मात्रा में पाया जाता है और इसी लिए यदि दोनों को साथ साथ लिया जाए तो पाचन में परेशानी हो सकती है । पाचन से संबंधित विभिन्न प्रकार की समस्याएं खड़ी हो जाती है जैसे कि उल्टी आना , बदहज़मी , अफारा , पेट दर्द आदि।
दुध के शत्रु -
मत्स्यमांसगुडमुद्गमुलकै: कुष्ठमावहती सेवितं पय: ।
शाकजांम्बवसुरादिसेवितं मारयत्यबुधमाशु सर्पवत।।

दुध के साथ मछली, मांस, गुड़, मुंग दाल, मूली, खाने से त्वचा के विवीध रोग उत्पन्न होते है। सब्जियां, जामुन, सूरा, मद्यजन्य पदार्थ, दुध के साथ लेने से तीव्र प्रकार की वेदना होती है कभी-कभी मृत्यु भि हो सकती है।
चित्र स्त्रोत गूगल
                                       
यद्यपि इन दोनों को एक साथ लेने में विज्ञान के अनुसार कोई आपत्ति नहीं है। परंतु आयुर्वेद के अनुसार इन दोनों के सेवन से शरीर में वात , कफ और पित्त जैसी समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं। डायटिशियनस के अनुसार इन दोनों के इकट्ठे सेवन से शरीर में विषाक्त तत्व उत्पन्न हो जाते हैं।
ऐसा भी देखा गया है कि चिकन या मछली खाने के बाद दूध पीने से त्वचा पर सफेद धब्बों के पड़ने की बीमारी हो जाती है।
दो-तीन घंटे के अंतराल से चिकन के बाद दूध पिया जा सकता है । फिर भी यदि हम ऐसा नही करें तो बेहतर रहता है।

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क्या सांप दूध पीते हैं ? ( Do snakes drink milk ? )

August 18, 2019 0
जी नहीं, साँप दूध नहीं पीते ǀ आप कह सकतें हैं कि “आप क्या बात करतें हैं, हमनें कितनीं ही बार सपेरों (साँप पकडनें वाले) को दूध पिलाते देखा है”ǀ हाँ, आपनें अवश्य देखा होगा लेकिन उसकी वास्तविकता कुछ और ही है 

सांपों का देखा जाना बड़ी साधारण सी बात है। शहर की अपेक्षा गांव में इसकी संख्या ज्यादा मात्रा में देखने को मिलती है। शहर में जंगलों की कमी होने के कारण सांप की मात्रा बहुत ना के बराबर देखी जाती है। लेकिन अगर हम गांव की बात करें तो शहर की अपेक्षा गांव में जंगलों की मात्रा अधिक होने के कारण ज्यादा मात्रा में सांप पाई जाती है।
यह जरूरी नहीं कि सांप हमेशा जंगलों में ही रहते हैं। सांप जमीन के अंदर बिल बना कर भी आसानी से अपना जीवन यापन कर सकते हैं। अतः बरसात के मौसम में गांव के सांपों को जयादा देखा जा सकता है।
पूरे दुनिया में लगभग 450 प्रजाति के सांप पाए जाते हैं। 8 से 9 प्रजाति के सांप ऐसे हैं जिनके काटने से इंसान के शरीर के अंदर विष फैलता है। बाकी के सभी सांप के अंदर या तो जहर नहीं होता है। या अगर होता भी है तो बहुत ही कम मात्रा में होता है।
जिससे इंसान की मौत नहीं होता है। सबसे पहले मैं आपको बताना चाहूंगा कि आजकल के समय में सांपों के काटने के बाद इंसानों के अंदर इतना डर बैठ जाता है। की इंसान डर के कारण मृत्यु को प्राप्त कर लेता हैं। अतः सांप के काटने के बाद घबराएं नहीं। आगे पढ़े
पहले मैं आपको यह बता दूँ कि साँप दूध क्यों नहीं पीते ?  प्रकृति अपनें में ‘परफेक्ट’ और मितव्ययी हैǀ अर्थात वह प्राणियों में उन्हीं अंगों और रसायनों का निर्माण करती है जिसकी उस प्राणी को आवश्यकता होती हैǀ साँप के आमाशय या आँत में दूध को पचा सकनें वाले रसायन का निर्माण ही नहीं होता अतः दूध का पाचन संभव नहीं ǀ जिस भोजन का पाचन प्राणी नहीं कर पाता उसका सेवन भी नहीं करता ǀ अतः साँप भी दूध नहीं पीता ǀ
अब दूसरी बात कि क्या पी सकता है ? तो उसका भी उत्तर है कि नहीं, क्यों कि लचीले गालों की अनुपस्थिति में वह तरल पदार्थों को मुँह में खींच नहीं सकता तथापि निचले जबड़े से जुडी बहुत सी त्वचा की सिकुड़न स्पंज की तरह पानीं को शोषित कर मुँह में डाल सकती है (Cundall, David. Drinking in Snakes: Resolving a Biomechanical Puzzel, 2012, Lehigh Univ , News Article), परन्तु दूध को नहीं क्यों कि दूध एक ‘कोल्याड़ल सल्यूशन’ होनें के कारण पानीं की सापेक्ष काफी गाढ़ा होता है /
सपेरे नाग पंचमी से एक महीने पहले से ही साँपों को पकड़ना प्रारम्भ कर देते है और इन्हे भूखा रखते ǀसाँप अपनीं पानी की जरूरत अपनें शिकार के शरीर में उपस्थित पानी से करता है  और बहुत विवशता या फिर बहुत दिनों से शिकार न मिलनें पर प्यास से जूझ रहा हो तब ही वो किसी तरल पदार्थ की ओर आकर्षित होता है ǀ बहुत दिनों से भूखा-प्यासा साँप न केवल कमजोर हो जाता है वरन डिहाइड्रेशन का भी शिकार हो जाता है ǀ  अब जब पीड़ित साँप के मुँह को दूध के पात्र में डाला जाता है तो ‘मरता क्या न करता’ की हालत में कुछ दूध वो पी लेता है लेकिन तुरंत ही अपना मुँह हटा लेता है ǀ लेकिन सपेरे को तो आज दिन भर उसी साँप को दूध पिलाना हैǀ तो वो क्या करता है, देखिये -
                                               
अब आता हूँ तीसरी बात पर कि फिर ये सपेरे क्या करतें है ? उसका मैं चित्रों के माध्यम से बतानें का प्रयास करता हूँ -
                                     

पहले चित्र में ‘क्यू’ क्लिप के बीच में एक नली का खुला सिरा दिखाई दे रहा हैǀ यह ‘ग्लोटिस’ है और जो नली दिखाई दे रही है वह ‘ट्रैकिया या विंड़ पाईप या स्वाँस नली हैǀ जैसा कि दोनों चित्रों में दिखाई दे रहा है कि ग्लोटिस’ निचले जबड़े में सबसे आगे की ओर खुलता है और जब जबड़े बंद होते हैं तो खिंच कर बाहर तक पहुँच जाता हैǀ ट्रैकिया या विंड़ पाईप या स्वाँस नली एक लम्बी संरचना होती है और ह्रदय के पास पहुँच कर दो भागों में विभक्त हो जाती है – एक बाँया भाग और दूसरा दाहिना भागǀ दोनों भाग अपनी और के फेफड़ों से जुड़े रहते हैं ǀ बायाँ फेफड़ा छोटा और अविकसित होता है जब कि दाहिना पूर्ण विकसित और बहुत लम्बा होता हैǀ इसका हृदय की और का भाग स्वसन में भाग लेता है जब की पीछे वाला भाग एक गुब्बारे जैसा ही होता है जिसमे हवा भरी तो रह सकती है परन्तु उस भाग में स्वसन नहीं होता हैǀ वायु इसी क्रम में फेफड़ों में आती है और इसके विपरीत क्रम में बाहर जाती है ǀ 
                           

अब जब सपेरे को दूसरी–तीसरी जगह साँप दूध पिलाना है तो वो साँप को नीचे दिखाये गये तरीके से पकड़ता है
                                            

स्वांस नली दबाव के कारण बंद हो जाती है ǀआठ-दस मिनट में उसके फेफड़े की ऑक्सीजन समाप्त होनें लगती है और अब जब सपेरा साँप के मुँह को दूध के पात्र में डालता है तो सांस खीचनें के साथ दूध उसके फेफड़ों में भर जाता है ǀ पात्र कुछ खाली हो जाता है और हम नाग देवता का आशीर्वाद मान खुश होतें है और अपनें ‘नाग देवता’ को धीमी परन्तु निश्चित मौत की ओर प्रयाण करनें के लिए हर्षित मन से बिदा कर देते हे ǀ
                                       
सपेरे जब साँपों को पकड़ते हैं तो सर्व प्रथम ज़हर के दाँत तोड़ देते है, उसकी पीड़ा, फिर भूख-प्यास की तड़प और अंत में जब दूध या तो पेट में गया या फिर फेफड़े मेंǀ पेट में जानें पर दूध की प्रोटीन और पानीं अलग हो गया ǀ पानीं से लाभ हुआ कि डिहाइड्रेशन की समस्या कुछ कम हुयी परन्तु प्रोटीन का पाचन तो संभव ही नहीं और दूसरी ओर मुँह घायल अतः कुछ निगला भी नहीं जा सकता तो फिर कमजोर तो हो ही जाना है ǀ अब यदि दूध फेफेड़े में जमा हो गया जिसकी संभावना रहती ही रहती है, तो साँस भी नहीं ली जा सकती और तब उन नाग देवता को जिनकी हमनें 15-20 दिन पहले पूजा की थी हमनें ही स्वर्ग की राह दिखा दी ǀ अब यह तो आप ही निर्णय लें कि आपको श्राप मिला या आशीर्वादǀ मैनें इस प्रश्न के उत्तर के माध्यम से अपनीं बात आप सभी तक पहुँचानें का एक प्रयास किया है ǀ
हम संकल्प लें कि आगामी ‘नाग पंचमी’ से हम अपनीं पूजा से नाग देवता की मृत्यु का कारण नहीं बनेंगे और यह बात घर-घर पहुँचायेंगे ǀ
नोट: ऊपर प्रस्तुत सभी चित्र ‘नाग’ के नहीं हैं ǀ अपनीं बात को आप तक पहुँचानें के लिए ‘गूगल’ की सहायता के लिए आभारी हूँ ǀ
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Saturday, August 17, 2019

लोग पेड़ों के नीचे सफेद रंग क्यों करते हैं ?

August 17, 2019 0

       लोग पेड़ों के नीचे सफेद रंग क्यों करते हैं ?


मेने अक्सर यही चीज़ कई बार बस से जाते हुए देखी की कई पेड़ों के तने के चारों ओर लाल और सफेद पेंट लगा हुआ हैं, खासकर जड़ों के ऊपर। इसे देखकर मुझे तो आश्चर्य हुआ, कारण जानकर आप भी होंगे।
ये पेंट वाइट वाश या चुना होता हैं। पेड़ों की पेंटिंग करने से, पेड़ की उम्र बढ़ जाती है, और पेड़ की सुरक्षा में भी सुधार होता है। क्योंकि इसकी कटाई नहीं की जा सकती है। पेड़ों पर की गई धारियाँ इस बात का संकेत हैं कि वे वन विभाग की नज़र में हैं। इस तरह से पेड़ की सुरक्षा बढ़ जाती है।
पेड़ो के निचले हिस्से को सफेद रंग दिया जाता है वह असल मे कोई पेंट या रंग नही है बल्कि चुना है। यह चुना दो तरह के काम करता है- एक तो यह रास्ते के पेड़ों को रात में दिखने लायक बनाता है और दूसरायह कि ये चुना फफूंदनाशक (fungicide) का काम करता है। कई बार रास्ते में लगे पेड़ पर गेरुआ व सफेद रंग की पुताई की जाती है।
                     
हालांकि कुछ राज्यों में पेड़ों को रंगने के लिए केवल सफेद पेंट का उपयोग किया जाता है, लेकिन कई राज्यों में लाल और नीले रंगों का भी उपयोग किया जा रहा है। इस प्रकार, वन विभाग पेड़ों की सुरक्षा के लिए काम करता है।

राजमार्ग सड़क के किनारे के पेड़ों को भी सफेद रंग से रंगा जाता है ताकि रात के दौरान ये पेड़ चमक के कारण आसानी से दिख सके। हालांकि, कई जगहों पर, इसलिए इन रंगों को कई रंगों से चित्रित किया जाता है। जैसे की सफेद, लाल, नीला आदि।
                 
पेड़ के निचले हिस्से में सफेद पेंट लगाने का सबसे महत्वपूर्ण कारण यह है कि ऐसा करने से पेड़ की नई छाल टूटने और फटने से बच जाती है। क्योंकि इस वजह से इस पर आसानी से कीड़े लग सकते है। अगर पेंट नहीं किया गया तो पेड़ों में कीड़ा लग सकता है, जिससे पेड़ों को नुकसान हो सकता है।

 समय के साथ-साथ संक्रमण या कीट के हमले को आसानी से देखा और इलाज किया जा सकता है। इसके अलावा पेंट करके इनमे आई दरारों को भरा जाता है जिनसे इनकी लाइफ बढ़ जाती है। वैसे भी नया पेड़ लगाने से अच्छा पुराने पेड़ों को बचाना ठीक रहता है

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भारत में सबसे सस्ते कपड़े कहां मिलते हैं ?

August 17, 2019 0

       भारत में सबसे सस्ते कपड़े कहां मिलते हैं ?

सर, आपने यह नहीं बताया कि आपको किस शहर से लेने है, भारत के हर राज्य में किसी ना किसी शहर में ससे सस्ते कपड़े मिल सकते है। फर भी में कुछ शहरों के   बारे में बता  रहा हूं    ।
अगर आप कम कीमत में कपड़े खरीदना चाहते हैं या फिर शादी और किसी दूसरे आयोजन के लिए खरीदारी के मूड में हैं, तो आपको देश की 5 फेमस थोक बाजार के बारे में जरुर चाहिए। इन बाजारों में कपड़े रिटेल मार्केट की तुलना में 30-40 फीसदी तक कम कीमत में मिल जाएंगे। देश की ये थोक मार्केट दिल्ली, जयपुर, सूरत, मुंबई में मौजूद हैं। जहां पर इन मार्केट के जरिए देश के दूसरे क्षेत्रों में कपड़े रिटेलर्स ले जाते हैं। ऐसे में आप यहां से डायरेक्ट खरीदारी कर पैसों की बचत कर सकते हैं।
                            
पंजाब: पंजाब के लुधियाना का वूलन मार्केट काफी फेमस है खासकर अगर वुलन्स के कपड़ों की खरीदारी आपको करनी है तो लुधियाना स्थित करीम पूरा बाजार और घुमर मंडी मार्केट आपके लिए बहुत ही बेहतर विकल्प है। इस मार्केट में पार्टी वेयर कपड़ों के साथ एक से बढ़कर एक वुलेन कपड़ों की 1,000 से भी ज्यादा दुकानें हैं। पुरुषों के लिए भी सभी तरह के कपड़े इस मार्केट में उपलब्ध हैंं। सबसे खास बात है कि सभी कपड़ों पर आपको 40 से 50 फ़ीसदी तक की छूट मिल जाएगी। नए स्टॉक के गर्म कपड़ों से सज चुका है लुधियाना का वुलेन मार्केट।
दिल्ली: दिल्ली में क्नॉट प्लेस, मजनू का टिला, रघुबीर नगर, करोल बाग, इंद्रपुरी, इंद्रलोक, भरत नगर, लाल किला, चांदनी चौक, पश्चिम पुरी, ईस्ट दिल्ली जैसे कई बाजारों में सेकंड हैंड कपड़े मिलते हैं। ईस्ट दिल्ली में कई जगह कपड़े और जींस किलो के भाव से भी मिलती है।
                                                  


यहां चांदनी चौक, नेहरू प्लेस, पालिका बाजार समेत कई ऐसे एरिया हैं जहां पर 100 रुपए की चीज 40-50 रुपए में मिल जाती है। लेकिन, दिल्ली में एक मार्केट ऐसा भी है जहां 100 रुपए की चीज 20 रुपए में मिलती है। इस मार्केट का नाम है चोर बजार।
                                  
1000 रुपए में मिल जाएंगे कई प्रोडक्ट्स :
इसे एशिया की सबसे सस्ती मार्केट कहा जाता है। यहां हजारों आइटम मिलते हैं।
आपके पास 1000 रुपए है, तो आप यहां से कई सारे आइटम खरीद सकते हैं।
इनमें बैग, ईयरफोन, सॉक्स, कॉसमेटिक और कई यूटिलिटी आइटम हो सकते हैं।
यहां कई ऐसे प्रोडक्ट्स जो आउटडेटेड हो चुके हैं उन्हें तो कई गुना कम कीमत में खरीदा जा सकता है।


न्यू मार्केट, कोलकाता: इसे हॉग्स मार्केट के नाम से भी जाना जाता है, ये कोलकाता की सबसे पुरानी और सबसे लोकप्रिय मार्केट है। बाजार में 2 हजार से ज्यादा स्टॉल हैं और यह उन लोगों के लिए सर्वश्रेष्ठ है जो अच्छा मोलभाव करना जानते हैं। बाजार के रीकंस्ट्रक्शन सेक्शन में जाएं यह कोलकाता की पर्यायवाची कही जाने वाली साड़ियों का स्थान है। यहां लाल बॉर्डर के साथ सफेद साड़ी, जिन्हे ‘लाल पार साड़ियां’ कहते हैं भी मिल जाएंगी, दुर्गा पूजा के दौरान यह महिलाओं की पारंपारिक पोशाक होती है। यहां आपके पास चुनने के लिए कई विकल्प हैं। टसर और विष्णुपुरी सिल्क साड़ियों को खोजिए, ये साड़ियां पहनने में काफी अच्छी लगती हैं। अगर आप अच्छे से छानबीन करें तो आपको यहां कम कीमत में अच्छी चीज मिल सकती है। 
पता- लिंडसे स्ट्रीट, न्यू मार्केट एरिया, धरमताला, तलताला, कोलकाता।

मुंबई: मुंबई में कोलाबा मार्केट और क्रॉफोर्ड मार्केट में सेकंड हैंड कपड़े पटरी पर बिकते हैं। यहां कलरफुल कुर्ते, काफ्तान, जींस, शर्ट आदि सेंकड हैंड कपड़े मिलते हैं। क्रॉफोर्ड मार्केट में भी सेकंड हैंड कपड़े पटरी पर बिकते हैं। इनकी कीमत 50 रुपए से 300 रुपए तक होती है।
                           

लाल दरवाजा मार्केट: अहमदाबाद, लाल दरवाजा शॉपिंग मार्केट अहमदाबाद का सबसे फेमस स्‍ट्रीट शॉपिंग मार्केट है। जहां पर कपड़े, इलेक्‍ट्रॉनिक आइटम्‍स और स्‍ट्रीट फूड की खरीदारी कर सकते हैं। यह मार्केट लाल दरवाजा अहमदाबाद में स्थित है इसके खुलने का समय सुबह 11 बजे से और बंद होने का समय रात 10 बजे है। यह मार्केट काफी भीड़-भाड़ वाला है यहां पर चोली, घाघरा, साड़ी, जूते-चप्‍पल, पुरानी किताबों की दुकान, बच्‍चों के लिए कपड़े और खाने-पीने की चीजें खरीद सकते हैं।
                                      

चिकपेटे, बंगलुरू: ये मार्केट बंगलुरू में चिकपेटे जगह पर संडे के दिन लगती है। यहां सेकेंड हैंड कपड़े, गुड्स, ग्रामोफोन, पुराने गैजेट्स, कैमरा, एंटीक, इलेक्ट्रॉनिक आइटम और सस्ते जिम इक्विमेंट मिलते हैं। ये मार्केट लोकल मार्केट की ही तरह है।
                           

जयपुर, राजस्थान: जयपुर मार्केट में सेकेंड हैंड कपड़ें मिलते हैं। यहां 20 रुपए से 300 रुपए में सेकंड हैंड कपड़े मिल जाएंगे। यहां शर्ट, पैंट, जींस, ड्रेस, सूट-सलवार, जैकेट खरीद सकते हैं जो नए कपड़ों की ही तरह लगते हैं
                                         
रोहताश नगर, शाहदरा: इस मार्केट में महिलाओं के लिए और बच्चों के लिए एक से बढ़कर एक वूलन कपड़े बजट के हिसाब से मिल जाएंगे। दूसरे रिटेल मार्केट से अगर तुलना करें तो यहां आपको 30 से 40 फ़ीसदी तक कम दाम देने पड़ेंगे।

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आधुनिक मोबाइल फ़ोन गर्म क्यों होते हैं? क्या खतरनाक है ?

August 17, 2019 0

आधुनिक मोबाइल फ़ोन गर्म क्यों होते हैं? क्या  खतरनाक  है ?( Why are Modern Mobile Phones Hot? Can it be dangerous?

यदि आप एक स्मार्टफोन इस्तेमाल करते हैं तो आपका फ़ोन गरम तो ज़रूर होता होगा, मगर हमें यह जानना चाहिए कि कब वह खतरनाक है और कब सामान्य।

                           आखिर फ़ोन गरम होता क्यों है?

  • आपके फ़ोन के एक प्रोसेसर(processor) लगा होता है जो हमेशा चलता रहता है, चाहे आप फ़ोन का इस्तेमाल करें या ना करें। इसका काम होता है जानकारी का इनपुट लेकर नतीजों का आउटपुट देना। प्रोसेसर के चलने से इलेक्ट्रान तेज़ी से दौड़ते रहते हैं। तेज़ी से दौड़ने के कारण यह आपस मे टकराते हैं तो गर्मी पैदा करते हैं।
                                 

  • अब आजकल फ़ोन बेहद पतले बनने लगे हैं। 7 mm, 6mm या 5mm तक के फ़ोन बनते हैं। इसका मतलब गरम होने वाला प्रोसेसर आपके हाथ के ठीक पीछे स्थित है। इससे उसकी गर्मी आपको तुरंत महसूस होने लगती है।


  • एक कारण है ओवरलोडिंग का। यह ठीक उस तरह है कि यदि आप कार को 30 की गति में चलाएंगे तो वह कम गरम होगी और यदि 100 में तो अधिक। इसी तरह भारी काम जैसे गेमिंग इत्यादि से आवक फ़ोन अधिक गरम होगा, सामान्य फ़ोन कॉल इत्यादि से नहीं।
                                       
  • इसके अलावा सभी कॉम्पनियों मे बैटरी को पतला बनाने और अधिक कैपेसिटी देने की होड़ लग गयी है। इससे गर्मी निकलने की जगह नहीं मिल पाती और वह गरम होती है।
                                    आधुनिक मोबाइल फ़ोन गर्म क्यों होते हैं? क्या  खतरनाक  है ?
  • आपको जानकर हैरानी होगी कि खराब नेटवर्क और खराब वाईफाई(wifi) सिग्नल भी फ़ोन के गरम होने के कारण बनते हैं। जब नेटवर्क खराब होता है तब फ़ोन जितना हो सके उतना सिग्नल हांसिल करने की कोशिश में एंटीना पर बहुत जोर लगाता है। इससे फ़ोन गरम होता है।
ध्यान रखिये- जब तक आपके फ़ोन का तापमान 48° से ऊपर नहीं जाता आप सुरक्षित हैं और आपको चिंता करने की कोई ज़रूरत नहीं है

आप सेटिंग्स में जाकर अपने फोन का तापमान स्वयं पता लगा सकते हैं। यदि आपको आपकी सेटिंग में यह नहीं मिलता तो आप यह एप्प डाउनलोड करके तापमान पर नज़र रख सकते हैं-
(यह कोई विज्ञापन नहीं है बल्कि मेरा एक सुझाव मात्र है। आप कोई भी एप्प इस्तेमाल कर सकते हैं)
48℃ तक आपको घबराने की ज़रूरत नहीं है लेकिन यदि आपका फ़ोन हमेशा ही इतना गरम रहता है तो यह चिंता की बात हो सकती है और आपको सर्विस सेंटर जाना चाहिए।आशा है यह जानकारी आपके लिए मददगार रही होगी। अपना और अपने फोन का ध्यान रखिये ! 
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